मऊ: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
राजभर ने कहा कि भारतीय संविधान के शिल्पकार ने देश के करोड़ों दलितों, पिछड़ों और शोषितों को जो संवैधानिक अधिकार दिए, उसी का परिणाम है कि आज इस समाज के लोग शासन, प्रशासन और राजनीति के सर्वोच्च पदों पर आसीन हैं।
उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने केवल एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की एकता और समानता के लिए काम किया। राजभर के इस बयान को यूपी की राजनीति में दलित और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ओम प्रकाश राजभर ने डॉ. आंबेडकर के प्रसिद्ध नारे 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' का जिक्र करते हुए कहा कि यह मंत्र आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि जब तक शोषित समाज पूरी तरह शिक्षित नहीं होगा, तब तक वह अपने अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाएगा। राजभर ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे बाबासाहेब के विचारों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुँचाएं।
उन्होंने कहा कि सुभासपा हमेशा से ही वंचितों की आवाज उठाती रही है और बाबासाहेब के सपनों का भारत बनाना ही उनका अंतिम लक्ष्य है। मंत्री ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों ने केवल डॉ. आंबेडकर के नाम पर राजनीति की, लेकिन उनके समाज को सशक्त नहीं बनाया।
कैबिनेट मंत्री ने आरक्षण के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि बाबासाहेब द्वारा प्रदत्त आरक्षण ही वह चाबी है जिससे बंद किस्मत के ताले खुले हैं। उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार और पार्टी आरक्षण के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी।
राजभर ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने जो कानूनी सुरक्षा कवच प्रदान किया है, उसे और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी ताकत को पहचानें और एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें।
राजभर के अनुसार, शोषितों को सम्मानजनक जीवन देना ही डॉ. आंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि सुभासपा का 'पीला झंडा' और बाबासाहेब का 'नीला झंडा' वैचारिक रूप से एक ही धरातल पर हैं—वह है गरीबों का उत्थान। राजभर ने घोषणा की कि वे आने वाले दिनों में डॉ. आंबेडकर की याद में कई सम्मेलनों का आयोजन करेंगे ताकि युवाओं को उनके संघर्ष और बलिदान से अवगत कराया जा सके।










