लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना मे रहने वाले शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की उनके ही 21 वर्षीय बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने रूह कंपा देने वाली क्रूरता के साथ हत्या कर दी थी। यह केवल एक संपत्ति विवाद नहीं था, बल्कि लगभग एक दशक से अक्षत के भीतर पनप रही नफरत का अंजाम था। पुलिस ने जब आरोपी अक्षत को गिरफ्तार किया, तो उसने बिना किसी पश्चाताप के अपना जुर्म कुबूल कर लिया, जिसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।
9 साल पुरानी नफरत और मां की खुदकुशी का बदला
अक्षत के मन में अपने पिता के प्रति नफरत का बीज वर्ष 2017 में ही बोया जा चुका था। उस समय अक्षत की मां ने पारिवारिक कलह और पिता के व्यवहार से तंग आकर जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। अक्षत तब से ही अपनी मां की मौत का जिम्मेदार अपने पिता को मानता था। इसके अलावा, उसे शक था कि उसके पिता के किसी अन्य महिला के साथ अवैध संबंध हैं, जिसके कारण उसके घर की शांति भंग हुई थी। अक्षत का मानना था कि उसके पिता ने उसकी मां को जीते जी मार दिया था।
वारदात की रात: तीसरी मंजिल पर मारी गोली, फिर घसीटकर लाया नीचे
घटना की रात अक्षत ने जब मानवेंद्र सिंह घर की तीसरी मंजिल पर स्थित कमरे में सो रहे थे, तब अक्षत ने पिता की लाइसेंसी पिस्टल से उनके सिर में गोली मार दी। गोली लगने से मानवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद, अक्षत ने साक्ष्य छिपाने के लिए भारी-भरकम शव को सीढ़ियों से घसीटते हुए ग्राउंड फ्लोर के एक सुनसान कमरे में पहुँचाया। घर में खून के धब्बों को साफ करने के लिए उसने घंटों मेहनत की ताकि सुबह किसी को शक न हो।
पोस्टमार्टम में बर्बरता का खुलासा: आरी से काटा पेट और पीठ
मानवेंद्र सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने अक्षत की हैवानियत की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने पिता की हत्या के बाद उनके शव को चार हिस्सों में बांटने की कोशिश की थी। उसने बाजार से खरीदी गई लकड़ी काटने वाली आरी से पेट और पीठ पर 8-8 इंच के गहरे घाव किए थे। वह शव को दो हिस्सों में बांटकर छोटे बैग में भरकर फेंकना चाहता था, लेकिन वह रीढ़ की हड्डी को नहीं काट सका। शव के गलने और दुर्गंध फैलने के डर से उसने घर में रूम फ्रेशनर का छिड़काव किया, ताकि पड़ोसियों को भनक न लगे।
शव ठिकाने लगाने की साजिश: गोमती नदी और 'नीला ड्रम' का खेल
अक्षत ने शुरू में सोचा था कि वह शव को अपनी कार में लादकर गोमती नदी में बहा देगा। उसने कोशिश भी की, लेकिन भारी शरीर को अकेले कार तक ले जाना उसके लिए संभव नहीं हो सका। इसके बाद उसने अपना प्लान बदला और बाजार से एक बड़ा नीला प्लास्टिक का ड्रम खरीदा। उसने शव के अंगों को उस ड्रम में फिट करने के लिए उन्हें काटा था। वह चाहता था कि ड्रम में एसिड या केमिकल डालकर शव को गला दे या फिर उसे सुनसान इलाके में फेंक आए।
'पापा लौट आओ': दोस्तों को गुमराह करने के लिए बनाया व्हाट्सएप ग्रुप
अक्षत एक शातिर अपराधी की तरह व्यवहार कर रहा था। पिता की हत्या के बाद उसने यह नाटक रचा कि उसके पिता कहीं लापता हो गए हैं। उसने 'पापा लौट आओ' नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जिसमें उसने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और पिता के मित्रों को जोड़ा। वह ग्रुप में भावुक संदेश भेजता था जैसे "पापा आप कहाँ हो? घर आ जाओ, आपकी बहुत याद आ रही है।" यह सब उसने इसलिए किया ताकि किसी को उस पर शक न हो और पुलिस को लगे कि वह एक परेशान बेटा है जो अपने पिता को ढूंढ रहा है।
हत्या से दो दिन पहले 'महिला मित्र' के फोन पर हुआ था विवाद
मानवेंद्र के साले और एसएस भदौरिया ने पुलिस को बताया कि हत्या से मात्र 48 घंटे पहले मानवेंद्र का एक महिला के साथ फोन पर काफी तीखा विवाद हुआ था। उस समय मानवेंद्र अपनी कार में थे और काफी गुस्से में लग रहे थे। पुलिस अब इस रहस्यमयी महिला की तलाश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उस विवाद का अक्षत के गुस्से से कोई सीधा संबंध था या अक्षत ने उसी विवाद का फायदा उठाकर हत्या को अंजाम दिया।
भतीजे ने दी मुखाग्नि; चीत्कारों के बीच हुआ अंतिम संस्कार
बुधवार को जब पोस्टमार्टम के बाद मानवेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर उनके आशियाना स्थित निवास पर पहुँचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। पिता की हत्या के आरोप में बेटा जेल की सलाखों के पीछे था। मानवेंद्र के भतीजे ने मुख्य रस्में निभाईं और मुखाग्नि दी। श्मशान घाट पर मौजूद लोगों के बीच बस एक ही चर्चा थी कि कैसे एक बेटे के भीतर की नफरत ने पूरे हंसते-खेलते परिवार को राख बना दिया।









