ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण लखनऊ के करीब 1.25 लाख लोग दुबई, ओमान, मस्कट और रियाद जैसे खाड़ी देशों में फंस गए हैं और वतन वापसी के लिए मदद मांग रहे हैं।

लखनऊ : ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो हलचल मचाई ही है, लेकिन इसका एक बड़ा संकट उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी देखने को मिल रहा है। खाड़ी देशों में काम करने वाले और वहां जियारत या पर्यटन के लिए गए लखनऊ के करीब सवा लाख लोग इस वक्त युद्ध जैसी स्थितियों के बीच फंसे हुए हैं। दुबई और अन्य पड़ोसी देशों द्वारा अपना एयरस्पेस बंद किए जाने के बाद वतन वापसी के सभी रास्ते फिलहाल बंद नजर आ रहे हैं।

​परिजनों की बढ़ी धड़कनें और गोंडा से अंबेडकरनगर तक चिंता का माहौल

​इस संकट का असर केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के जिलों में भी भारी चिंता देखी जा रही है। अकेले लखनऊ से 1.25 लाख से अधिक लोग इस समय ओमान, बहरीन, मस्कट, रियाद और दुबई जैसे शहरों में मौजूद हैं। वहां फंसे लोगों में 90 प्रतिशत ऐसे कामगार हैं जो अपनी रोजी-रोटी के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। इसके साथ ही गोंडा के शास्त्रीनगर तोपखाना मोहल्ले सहित अंबेडकरनगर के 100 से अधिक परिवारों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिनके परिजन शिक्षा या रोजगार के सिलसिले में ईरान के विभिन्न शहरों में रह रहे हैं।

​हवाई सेवा ठप और इंडिगो के यात्री सबसे ज्यादा परेशान

​शनिवार को जैसे ही दुबई का एयरस्पेस बंद होने की खबर आई, लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा और तनाव को देखते हुए कुल 17 उड़ानों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। इंडिगो की उड़ान संख्या 6ई-097, 6ई-083, 6ई-053 और 6ई-071 सहित कई विमानों को रद्द किया गया है। लखनऊ से दम्माम और रियाद जाने वाली उड़ानों के साथ-साथ वहां से वापस आने वाली फ्लाइट्स (6ई-098, 6ई-054) भी रविवार तक के लिए निरस्त कर दी गई हैं।

​जियारत पर संकट और ट्रेवल एजेंसियों के पास फोन की कतार

​हर महीने लखनऊ से करीब 700-800 लोग जियारत के लिए ईरान जाते हैं, जो अब सीधी फ्लाइट न होने और कनेक्टिंग फ्लाइट्स रद्द होने से अधर में लटके हैं। लखनऊ की प्रमुख ट्रेवल एजेंसियों के पास शनिवार सुबह से ही सैकड़ों फोन आ रहे हैं। एयरवॉक ट्रेवल एजेंसी के मालिक आतिफ ने बताया कि लखनऊ एयरपोर्ट से हर हफ्ते खाड़ी देशों के लिए करीब 115 उड़ानें संचालित होती हैं, जिनके यात्री अब डरे हुए हैं। दो दिन पहले ही दुबई गए अजीत हैदर जैसे कई यात्री अब वतन वापसी के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं।

​घरेलू उड़ानों पर भी पड़ा परिचालन का दबाव

​खाड़ी देशों के संकट के बीच लखनऊ एयरपोर्ट पर घरेलू विमान सेवाओं पर भी असर पड़ा है। शनिवार को अमौसी एयरपोर्ट से किशनगढ़ और झारसुगुड़ा के बीच चलने वाली स्टार एयर की चार उड़ानें (S5-223, S5-229 आदि) परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण निरस्त रहीं। इससे स्थानीय यात्रियों को भी भारी असुविधा झेलनी पड़ी और एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ जमा हो गई।

​भारतीय दूतावास की सक्रियता और हेल्पलाइन नंबरों की मांग

​खाड़ी देशों में फंसे हजारों लखनवियों की सुरक्षा को लेकर अब भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की उम्मीद की जा रही है। वहां फंसे लोगों के परिजनों ने सरकार से मांग की है कि ईरान और खाड़ी देशों में भारतीय दूतावास सक्रिय हो और फंसे हुए नागरिकों के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएं। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए लोग सोशल मीडिया के जरिए भी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से सुरक्षित निकासी की अपील कर रहे हैं।

​मध्य पूर्व में बिगड़ते हालात और कच्चे तेल की कीमतों पर असर

​ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर केवल उड़ानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की भी आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक चलता है, तो खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, जिसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इससे आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने का खतरा भी मंडरा रहा है।