भोपाल। मध्य प्रदेश के शहरी निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की नियुक्ति को लेकर चल रहा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। राज्य सरकार ने 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन के नामों की घोषणा कर दी है। एल्डरमैन की नियुक्ति को सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले भाजपा की सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी ने इसके जरिए जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और संगठन को सक्रिय करने की दिशा में बड़ा दांव चला है।
अनुभवी चेहरों के जरिए बढ़ेगा प्रभाव
एल्डरमैन के रूप में उन नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं। ऐसे अनुभवी कार्यकर्ता न केवल परिषद के कामकाज को समझते हैं, बल्कि जनता के बीच उनकी पकड़ भी मजबूत होती है। इससे भाजपा को स्थानीय मुद्दों पर बेहतर पकड़ बनाने में मदद मिलेगी और चुनाव के समय इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश
राजनीतिक दृष्टि से इन नियुक्तियों को संगठन के भीतर असंतोष को कम करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। कई ऐसे कार्यकर्ता और नेता थे, जो लंबे समय से किसी जिम्मेदारी या पद की प्रतीक्षा कर रहे थे। एल्डरमैन बनाकर भाजपा ने उन्हें संगठन के साथ जोड़े रखने और नाराजगी दूर करने का दांव चला है। इससे निकाय चुनाव के पहले पार्टी के भीतर एकजुटता बढ़ेगी।
ग्राउंड लेवल पर कैडर होगा एक्टिव
एल्डरमैन परिषद की बैठकों में भाग लेते हैं और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं। भले ही उनके पास वोटिंग का अधिकार नहीं होता, लेकिन वे नीतिगत दिशा तय करने में सुझाव देते हैं। ऐसे में पार्टी के ये प्रतिनिधि लगातार स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहेंगे, जिससे संगठन का कैडर भी एक्टिव रहेगा। यह चुनावी माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भाजपा ने इस नियुक्ति के जरिए विकास कार्यों की मॉनिटरिंग को भी मजबूत करने की कोशिश की है।
राजनीतिक संतुलन साधने की गणित
अनुभवी एल्डरमैन परिषदों के कामकाज पर नजर रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सुझाव दे सकते हैं। इससे शासन और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और विकास कार्यों की गति पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इन नियुक्तियों के माध्यम से पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रों और गुटों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास भी किया है। जहां सहमति नहीं बन पाई, वहां सूची रोककर पार्टी ने संकेत दिया है कि वह आंतरिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेना चाहती है।










