हरियाणा के जसिया स्थित सर छोटूराम धाम के प्रबंधन और इसके संविधान को लेकर विवाद गहरा गया है। 

जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संरक्षक यशपाल मलिक और जाट सेवा संघ की मौजूदा कार्यकारिणी आमने-सामने हैं। इस गतिरोध को सुलझाने के लिए अब हुड्डा खाप ने मोर्चा संभाला है और आगामी 7 मार्च को एक बड़ी महापंचायत बुलाई है।

विवाद की जड़ बनी  'संविधान की कमियां' बनाम 'पैसों का हेरफेर'
जाट सेवा संघ के प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने वर्तमान संविधान पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

  • कार्यकाल की अनिश्चितता: संविधान के अनुसार ट्रस्टियों का कार्यकाल 5 साल है, लेकिन इसमें 'कार्यकाल बढ़ाने' का ऐसा प्रावधान है जिससे कोई भी ट्रस्टी दशकों तक पद पर बना रह सकता है।
  • 'सेटलर' शब्द पर आपत्ति: भूपेंद्र सिंह का कहना है कि 24.5 एकड़ जमीन समाज के पैसे से खरीदी गई है, फिर संविधान में यशपाल मलिक के लिए 'सेटलर' (संस्थापक/मालिक) शब्द का इस्तेमाल क्यों किया गया?
  • सदस्यता का भ्रम: ₹21,000 देने वालों को लाइफटाइम मेंबर बताने वाली बुकलेट छपवाई गई, जबकि संविधान में इसका कोई जिक्र नहीं है।
  • दिल्ली में रजिस्ट्रेशन: जब धाम रोहतक में है, तो ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन दिल्ली में क्यों कराया गया?
  • असीमित शक्तियां: आरोप है कि ट्रस्टी चुनने की पूरी पावर केवल यशपाल मलिक के पास है, उन्होंने अपनी मर्जी से 15 ट्रस्टी बनाए हैं। भूपेंद्र सिंह का कहना है कि "अगर किसी ट्रस्टी के मन में लालच आ जाए, तो वह वर्तमान नियमों का फायदा उठाकर अपना कार्यकाल 50 साल तक बढ़ा सकता है। हम इस तानाशाही को खत्म करने के लिए संविधान में संशोधन चाहते हैं।"

यशपाल मलिक ने किया पलटवार: 'कब्जा करने की साजिश'
दूसरी ओर, यशपाल मलिक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ट्रस्ट पर कब्जा करने की कोशिश बताया है। मलिक का सवाल है कि चेयरमैन रणधीर सिंह पिछले साढे तीन साल से पद पर हैं, उन्हें अब संविधान में कमियां क्यों दिख रही हैं? मलिक ने आरोप लगाया कि कार्यकारिणी संघ के पैसों का दुरुपयोग कर रही है और हिसाब नहीं दे रही है।उन्होंने दावा किया कि रणधीर सिंह किसी राजनेता के इशारे पर काम कर रहे हैं।

7 मार्च को की जाएगी महापंचायत
हुड्डा खाप की अध्यक्षता में होने वाली इस पंचायत में सभी खापों को आमंत्रित किया गया है।7 मार्च की पंचायत तय करेगी कि यह विवाद सुलझेगा या कोर्ट की चौखट तक पहुंचेगा।दोनों पक्षों को अपनी बात रखने के लिए बुलाया गया है।यदि पंचायत में सहमति नहीं बनी, तो मामला कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ सकता है।यशपाल मलिक ने साफ किया है कि उन्हें ऐसी किसी पंचायत कीआधिकारिक जानकारी नहीं है और न ही वह इसमें शामिल होंगे।

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