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छत्तीसगढ़ प्रदेश आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता सहायिका संघ के आह्वान पर प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं मांगे पूरी न होने पर विधानसभा का घेराव करेंगे।

सुकमा। महंगाई और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच वर्षों से कम मानदेय पर काम कर रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अब अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता सहायिका संघ के आह्वान पर प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी तेज हो गया है। लंबित मांगों के निराकरण को लेकर संघ ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल निर्णय की मांग की है।

संघ की जिला अध्यक्ष दुलारी धाम ने कहा कि, देश को आजाद हुए पांच दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब भी न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और शासकीय कर्मचारी का दर्जा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। उन्होंने कहा कि, सरकार की तमाम योजनाओं का प्रयोग आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से होता है, इसके बावजूद उन्हें नजर अंदाज किया जा रहा है।

मानदेय बेहद कम, जिम्मेदारियां अपार
ज्ञापन में लिखा गया कि, वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मात्र 6 हजार रुपये और सहायिकाओं को 2210 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो मौजूदा महंगाई में बेहद कम है। जबकि पोषण आहार वितरण, टीकाकरण अभियान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य देखभाल, प्री-स्कूल शिक्षा, सर्वेक्षण कार्य, चुनाव ड्यूटी सहित अनेक शासकीय दायित्व उन्हीं के कंधों पर हैं।

ये हैं संघ की प्रमुख मांगे-

  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देकर नियमित किया जाए। 
  • कार्यकर्ताओं का मानदेय 26,000 रुपये और सहायिकाओं का 22,100 रुपये प्रतिमाह किया जाए। 
  • वृद्धावस्था पेंशन, समूह बीमा, दुर्घटना बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू करने की मांग प्रमुखता से रखी गई हैं। 

26-27 फरवरी को हड़ताल
संघ ने घोषणा की है कि, 26 और 27 फरवरी 2026 को प्रदेशभर में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखकर कार्य बहिष्कार और धरना प्रदर्शन किया गया। यदि मांगें नहीं मानी गई, तो 9 मार्च 2026 से रायपुर में लगभग एक लाख कार्यकर्ता और सहायिकाएं अनिश्चितकालीन आंदोलन और विधानसभा घेराव करेंगी।

सरकार पर अनदेखी का आरोप
संघ का आरोप है कि, बजट 2026-27 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हितों की अनदेखी की गई है, जिससे प्रदेशभर में आक्रोश है। सुकमा जिले में भी आंदोलन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। विभिन्न परियोजना क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर रणनीति बनाई जा रही है। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल होने के लिए सक्रिय हैं।

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