धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ को  पृथक राज्य बने 25 साल पूरे हो गए हैं। इस अनुपात में खेतों की सिंचाई का साधन अब भी नाम मात्र को ही है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य गठन के 25 साल पूरे होने के बाद भी राज्यभर में सिंचाई का क्षेत्रफल 34 प्रतिशत से अधिक नहीं हो पाया है। हालत ये है कि राज्य के 33 में से एक तिहाई यानी 11 जिलों में संपूर्ण फसलों के क्षेत्रफल से सिंचित क्षेत्रफल का रकबा 10 प्रतिशत भी नहीं हो पाया है।

हालत यह है कि, बस्तर और सरगुजा संभाग में तो खेती आज भी लगभग भगवान भरोसे ही हो रही है। लेकिन दूसरी ओर राज्य शासन सिंचाई के साधन बढ़ाने की कोशिश में भी है। छत्तीसगढ़ की कुछ निर्माणाधीन सिंचाई योजनाएं पूरी होने से सिंचित क्षेत्र के रकबे में बढ़ोतरी होने की संभावना है। कृषि व्यवस्था पर आधारित छत्तीसगढ़ में लगभग 70 प्रतिशत आबादी खेती-किसानी और उससे जुड़े कारोबार पर आश्रित है। वर्ष 2000 में राज्य गठन के समय ये उम्मीद बनी थी कि अगले 10-20 साल में प्रदेश में सिंचाई के साधन बढ़ेंगे, लेकिन यह अपेक्षा अभी अधूरी है। प्रदेश में अब तक कुल मिलाकर 34 प्रतिशत रकबा ही सिचिंत हो पाया है।

एक नजर सबसे कम सिंचित जिलों पर
राज्य में 33 जिलों में सबसे कम सिंचित जिलों की बात करें तो स्थिति साफ होती है कि कहां सिंचित क्षेत्र कितने प्रतिशत है। बस्तर 7, कोंडागांव 7, नारायणपुर 1, दंतेवाड़ा ०, सुकमा ०, बीजापुर 3. कोरबा 1. बलरामपुर 4, कोरिया 6, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर 4. जशपुर 41 सूरजपुर और सरगुजा में सिंचित क्षेत्र 10 प्रतिशत से अधिक नहीं है।

इन जिलों में सबसे अधिक सिंचाई का क्षेत्रफल
राज्य के कई जिलों में सिंचाई के साधनों का काफी विस्तार भी बीते 25 साल में हुआ है। राज्य में सबसे अधिक सिंचित जिलों में रायपुर 82 में प्रतिशुत, बलौदाबाजार 56, गरियाबंद 41. महासमुंद 38, धमतरी 68, दुर्ग 72, बालोद 54, बेमेतरा 55, कबीरधाम 48. बिलासपुर 49. जांजगीर 89, सक्ती में 65 फीसदी सिंचाई सुविधाएं हैं।

अब नई परियोजनाओं पर भरोसा
ऐसा भी नहीं है कि राज्य सरकार सिंचाई परियोजनाओं को लेकर गंभीर नहीं है, लेकिन इन परियोजनाओं के शुरू होने से लेकर अमल में आने तक काफी अरसा लगता है। राज्य में कुछ सिंचाई परियोजनाएं जो निर्माणाधीन हैं, उनके पूरे होने के बाद सिंचाई के साधन बढ़ने की उम्मीद है। 

चार परियोजनाएं प्रगति पर
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अंतर्गत राज्य की 4 योजनाएं शामिल है, जिनमें एआईबीपी की केलो परियोजना शामिल है, जिसका कार्य प्रगति पर है तथा सीएडी एंड डब्ल्यूएम के अंतर्गत 3 योजनाएं जैसे केलो परियोजना, खारंग परियोजना, मनियारी परियोजना शामिल है, जिससे क्रमशः 21225 हेक्टेयर, 8300 हेक्टेयर तथा 11515 हेक्टेयर क्षेत्र में सुलभ रूप से सिंचाई उपलब्ध की जा सकेगी तथा इन योजनाओं को दिसंबर 2026 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है। इन कार्यों की नियमित समीक्षा केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।

जशपुर जिले में 4837 हेक्टेयर तक पहुंचेगा पानी
इसी प्रकार भारत सरकार की एम-सीएडी (समृद्धि योजना) के अंतर्गत जिला जशपुर में बगिया दाबयुक्त पाइप वितरण प्रणाली योजना, एक पायलट परियोजना के रूप में प्रारंभ की जा रही है, जिससे 4837 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है।