रायपुर। नक्सलमुक्ति का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, डेडलाइन में सिर्फ पांच दिन शेष हैं। गृहमंत्री विजय शर्मा आश्वस्त हैं कि डेडलाइन से पहले नक्सलियों का पूरा कैडर पुनर्वास के लिए वापसी कर लेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा कि जो नहीं आएंगे, उनका अंत तय है। श्री शर्मा ने नक्सलमुक्ति के पीछे उन अटकलें-आरोपों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि उद्योगपतियों को सौंपने के लिए बस्तर को खाली कराया जा रहा है। उनका साफ कहना है कि किसी भी तरह के भ्रम में रहने और किसी की बातों में आने की जरूरत नहीं है।
नक्सलमुक्त होने के बाद बस्तर को हमारी सरकार लघु वनोपज से ही संवारने का काम करेगी। बस्तर को किसी भीउ द्योगपति के हवाले करने की कोई योजना नहीं है। यह बात हमारे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी सदन में कह चुके हैं। इस मुद्दे पर श्री शर्मा से हरिभूमि और आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने इंद्रावती तट पर गुरुवार को सार्थक संवाद किया। पेश हैं प्रमुख अंश-
नक्सलवाद समाप्त करने की डेडलाइन 31 मार्च 2026 से कितने दूर या कितने करीब हैं ?
मैं सोचता हूं कि लक्ष्य की प्राप्त हो ही गई है, बस फाइनल टच ही बाकी है। एक बड़ा नाम जो रह गया था पापा राव, उनका भी समर्पण हो गया है। और कोई बड़े लेवल का नक्सली बचा नहीं है, ऊपर के लोग पहले ही समाप्त हो चुके हैं। तीन हजार लोगों ने पुनर्वास किया है दो सालों में। दो हजार लोग गिरफ्तार हुए हैं दो साल में, पांच सौ से ज्यादा मारे गए। कुल मिलाकर यह संख्या जाती है साढ़े पांच हजार। आज हम रामनवमी पर चर्चा कर रहे हैं तो मैं कहना चाहता हूं कि बस्तर ही वह क्षेत्र है जहां के लोग राम के साथ चले थे और लंका पर विजय पाई गई थी। बस्तर में जो हो रहा था वह बड़ा दर्दनाक था। एक बच्ची को मैं जानता हूं जिनका टिफिन आंगनबाड़ी में छूट गया था, वह लेने गई, वह टिफिन फटा, उनका भाई अंधा हो गया है, उस बच्ची को भी बहुत कम दिखता है। ऐसे हजारों की संख्या में पीड़ित हैं, जो आईडी की चपेट में आए। कई शिक्षाविदों, गांव के सरपंचों, पंचों, ग्रामीणों को मार दिया। मैंने लोगों से कई बार कहा है 31 मार्च के बाद इंद्रावती के तट पर आराम से बैठ पाएंगे, देखिए हम आज 31 मार्च से पहले इंद्रावती के तट पर बैठकर ही चर्चा कर रहे हैं। 31 मार्च से पहले नक्सलियों का पूरा कैडर वापस आकर पुर्नवास कर चुका होगा, यह मैं दावे के साथ कह रहा हूं। अगर कोई नहीं आता है तो उनका भी अंत होगा, यह तय है।
गृहमंत्री के पद को सूली वाला माना जाता है, जब आपको गृह विभाग मिला तो क्या लगा था? किसके षड्यंत्र के शिकार हो रहे थे विजय शर्मा?
पार्टी का फैसला हुआ कि यह दायित्व संभालना है। जब पार्टी का फैसला हो जाता है तो भाजपा का सिपाही सोचता नहीं है। पुल पुलिया का काम बहुत किया है हमने, फिर यह काम मेरे सामने आया तो लगा कि मुझे ही इस काम के लिए चुना गया है तो यह करना ही है। पूरे देश के नक्सलवाद का 75 फीसदी बस्तर में था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही नक्सलवाद को समाप्त होने की बात कहीं थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्रीय मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ आए थे। उन्होंने नक्सलवाद को समाप्त करने का ऐलान किया। मुझे गृह मंत्री बनाने के पीछे किसी का षडयंत्र नहीं लगता है।
आप खुद पुलिस प्रताड़ना के शिकार रहे हैं, जब आपको पुलिस विभाग का काम मिल गया तो कितना मुश्किल रहा है पुलिस वालों से काम लेना?
काम करवा लेना राजनीतिक इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है। मेरे ऊपर ऐसी धाराएं लगाई गई थीं, एफआईआर की गई थी जिसका कोई आधार ही नहीं था। जिस जेल में मुझे रखा गया था, मैं उस जेल के निरीक्षण में भी गया था। बस्तर में क्या बदला अधिकारी भी वहीं रहे, लेकिन काम हो गया। हमारे केंद्रीय मंत्री अमित शाह और हमारे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में काम हुआ है। आज पुलिस विभाग में कई ऐसे काम हुए हैं जो पहले कभी नहीं हुए।
पहले भी सरकार रही, पहले भी लक्ष्य रहा, लेकिन पहले लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सका, इस बार लक्ष्य प्राप्त हो रहा है, क्या कारण रहा है?
सब अभूतपूर्व है, मैंने अमित शाह जी से पूछा था, आपने किस आधार पर यह कहा है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त कर देंगे, उन्होंने कहा था विश्वास करके चलो लक्ष्य पूरा होगा। अगर समय सीमा तय नहीं होगी तो ठीक नहीं होगा। समय सीमा तय होने पर उस लक्ष्य को लेकर काम किया जाता है। अगर 24 अगस्त 2024 को यह नहीं कहा गया होता कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा तो बस्तर की जनता के मन में विश्वास ही पैदा नहीं होता। डेडलाइन से एक रणनीति बनी। जनता ने भी पुनर्वास के लिए नक्सलियों से कहा, जनता ने पूरा साथ दिया।
अमित शाह के नक्सलवाद को समाप्त करने के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री साय और विजय शर्मा कितनी दहशत में आए थे?
लक्ष्य तय करने के लिए साहस की जरूरत होती है और उसे पूरा करने के लिए सामर्थ्य की जरूरत होती है। मैं असम भी गया था, मैंने देखा वहां पर किस तरह से सामूहिक पुनर्वास किया गया था। मैंने देखा पहले देश में जिस तरह से आतंकवादी हमले होते थे, बम फूटते थे, वो अब नहीं होते हैं। उनको मालूम है अब दिल्ली में बिरयानी नहीं खिलाई जाएगी गोली मार देंगे। जब श्री शाह ने ऐलान किया था तो उसको समझने में दो दिन का समय लगा लेकिन अविश्वास का कोई सवाल ही नहीं था। कोशिश सभी सरकारों ने की, लेकिन इस बार के जो भी आपरेशान हुए, वह तकनीकी रूप से किए गए। ये ऑपरेशन परफेक्ट आपरेशन रहे। हमने देखा कि बस्तर के युवाओं को खेल पसंद है तो हमने यहां पर बस्तर ओलंपिक का भी आयोजन प्रारंभ किया। इसी के साथ यहां की संस्कृति को लेकर बस्तर पंडुम महोत्सव का आयोजन किया गया। हमने पंचायतों को प्रस्ताव दिया, आपके पंचायतों में पुनर्वास होता है और आप लिखकर देते हैं कि हमारी पंचायत नक्सलमुक्त हो गई है तो एक करोड़ देंगे। कई पंचायतों ने ऐसा काम किया। जिला पंचायतों के अध्यक्षों और सदस्यों ने भी काम किया। नक्सलियों को लेकर आए और पुनर्वास करवाया है। पत्रकारों ने भी इसमें काम किया और सहयोग किया है। कई समाज के लोगों ने भी काम किया। सबसे बड़ा काम हमारी फोर्स ने किया। उनकी ताकत से ही यह सब संभव हो सका है।
विपक्ष की क्या भूमिका रही, खास तौर पर कांग्रेस की क्या भूमिका रही?
सिर्फ विरोध करने के लिए ऐसे मुद्दे पर भी विरोध किया जाता है तो कष्ट होता है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ऐसा किया, लेकिन बस्तर के नेताओं ने तो खुलकर सदन में भी कहा, हमारे बस्तर में शांति है। दीपक बैज भले कुछ भी कहें, बस्तर के लोग मानते हैं वहां शांति है। बस्तर के लोग आज खुलकर हंसते हैं। एक साल पहले बस्तर जाते थे तो एक कागज नहीं आता था, अब लोग मांगें करने लगे हैं सड़क चाहिए, ये चाहिए, वो चाहिए। इतना सब होने के बाद अगर कोई इसको नहीं मानता है और गलत बात कहता है तो यह मानसिक दिवालियापन है।
भूपेश बघेल पहले कह रहे थे, तेलंगाना जाकर नक्सली समर्पण कर रहे हैं, अब दीपक बैज कहते हैं छत्तीसगढ़ में इतने नक्सली कैसे समर्पण कर रहे हैं। कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के बयान में इतना विरोधाभास क्यों दिखता है?
परस्पर अंतर विरोध तो है ही, बयानों में भी यह विरोध सामने आते रहता है। तेलंगाना या ओडिशा में पुनर्वास करने का अपना अलग-अलग कारण होता है। कई लोगों ने यहां पर समर्पण किया वो तेलंगाना के रहने वाले थे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मेरी दीपक बैज को सलाह है कि ऐसे बयानों से बचना चाहिए। बस्तर की जनता आपको माफ नहीं करेगी अगर आप इतने बड़े पराक्रम को डील कहें तो इसे कोई माफ नहीं करेगा। यह बहुत बड़ा अपमान है फोर्स और जनता का।
समर्पण करने वाले नक्सलियों का भविष्य क्या है?
तीन हजार में से 12 सौ तो अनपढ़ हैं। इनकी साक्षरता के लिए और कौशल उन्नयन के लिए काम किया जाएगा। इनके कागज बन जाए खेती शुरू हो जाए। ऐसा काम होगा। जो जैसा काम करना चाहेगा वैसी व्यवस्था होगी।
एक आदिवासी को मुख्यमंत्री बनाया गया, उनकी क्या भूमिका रही?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सौम्य चेहरा और सहजता, सरलता है। उन्होंने खुद बस्तर का प्रवास किया। उनका बहुत बड़ा योगदान है।
पंचायत मंत्री के रूप में क्या योजनाएं हैं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए?
एक और विभाग साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग भी मेरे पास है। इस विभाग में हम साइंस सिटी खोलने वाले हैं। एक योजना ला रहे हैं विज्ञान तीर्थ दर्शन। पंचायत विभाग में भी काम हो रहा है। हमने महतारी सदन बनाया है। स्वसहायता समूह में 30 लाख महिलाएं हैं। दीदी के गोठ भी चल रहा है। लखपति दीदी भी बन रही हैं। ये मंच पर आकर कहती हैं कि करोड़पति बनना है। महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से बस्तर में भी काम कर रहे हैं।
बस्तर की जो पंचायतें नक्सल प्रभावित रही हैं उनके लिए क्या कोई विशेष योजनाएं लाई जाएंगी?
हमारे गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव की सोच है कि बस्तर संभाग सात जिलों का संभाग है, यह देश का सबसे उन्नत संभाग बनेगा। इसको लेकर काम किया जाएगा। इसके लिए राशि का कोई विषय नहीं है। जितना पैसा लगेगा उतना मिलेगा। बजट में प्रावधान भी किया गया है।
नक्सलियों से जो हथियार मिल रहे हैं, उसके संदर्भ में क्या योजना है?
एके 47 और कई हथियार तो पुलिस प्रशासन से ही लूटे हुए हैं। जो भी हथियार आ रहे हैं उसकी मेपिंग हो रहे हैं। इसके बाद फैसला किया जाएगा कि इनका क्या करना है।
प्रभारी डीजी के भरोसे चल रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट भी इस पर नाराज है, क्या उम्मीद करें?
मुख्यमंत्री के साथ इस विषय पर जरूर चर्चा होगी। इस पर जल्द फैसला होगा।
नक्सलियों के लिए आवास की कोई व्यवस्था होगी?
केंद्र सरकार से विशेष पैकेज में 15 हजार आवासों की मंजूरी मिली है। ये आवास पुर्नवास करने वाले नक्सलियों को दिए जाएंगे। इनमें से चार हजार आवास हमने दे भी दिए हैं।
रास्ते तो खुल गए लेकिन सड़कों को लेकर क्या ?
सड़कों को भी बनाने का काम होगा। कई स्थानों पर अलग-अलग योजनाओं में काम हो रहे हैं।
कहा जा रहा है कि बस्तर से नक्सली इसलिए समाप्त किए जा रहे हैं क्योंकि इसको अडानी, अंबानी के हवाले करना है?
मुख्यमंत्री ने सदन में इस बात को कहा है सरकार की ऐसी कोई योजना ही नहीं है। एनएमडीसी काम कर ही रहा है, आयरन ओर है यहां पर। लघु वनोपज ही बस्तर की आर्थिक उन्नति का आधार बने यही सरकार की योजना है।
जो जवान शहीद हुए हैं, उनके परिवार के लिए भी कोई योजना है?
यह जो पुनर्वास नीति है यह केवल नक्सलियों के लिए ही नहीं है, नक्सल पीड़ितों के लिए भी है। इनको भी जिस तरह से सहयोग की जरूरत है वह भी कर रहे हैं।








