आशीष कुमार - बतौली/सरगुजा। क्षेत्र में शासकीय निस्तार की भूमि पर अवैध कब्जे की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्राम झरगंवा की 4 एकड़ 65 डिसमिल निस्तार भूमि पर फर्जी पट्टे और राजस्व विभाग की कथित मिलीभगत से कब्जा करने की ताज़ा कोशिश ने ग्रामीणों में आक्रोश फैला दिया। ग्रामीणों के विरोध के बाद बाहरी कब्जाधारी मौके से भाग निकला और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया।
शासकीय भूमि पर कब्जे की बड़ी कोशिश
ग्राम झरगंवा, बभनीनगढ़ के नीचे स्थित शासकीय निस्तार की 4.65 एकड़ भूमि पर मूलतः बारगीडीह और वर्तमान में रायपुर निवासी व्यक्ति द्वारा घेराव की कोशिश की जा रही थी। आरोप है कि राजस्व विभाग की कृपा से इस भूमि को खसरा नंबर 147/2 रकबा 0.5870 के आधार पर गलत तरीके से सोफिया फिरदोषी पत्नी मोहम्मद इमरान खान के नाम दर्ज बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि निस्तार भूमि का पट्टा पहले झरगंवा निवासी शाखा राम के नाम था, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद बिना सहमति, बिना प्रक्रिया और बिना अधिकार इस भूमि को नए नाम पर दर्ज कर दिया गया।
पटवारी पर आरोप- ‘दो वर्षों से कब्जाधारी को संरक्षण’
ग्रामीणों ने झरगंवा के पटवारी राजेंद्र पैंकरा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से वे अवैध कब्जाधारी को संरक्षण दे रहे हैं। इसी वजह से बाहरी व्यक्ति के हौसले बुलंद हुए और उसने लाखों रुपये का सामान गिराकर जेसीबी के सहारे घेराव शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का उग्र विरोध, कब्जाधारी मौके से फरार
जैसे ही ग्रामीणों को घेराव की जानकारी मिली, सैकड़ों ग्रामीण बभनीनगढ़ पहुँच गए। ग्रामीणों के विरोध के बाद कब्जाधारी डरकर मौके से भाग खड़ा हुआ, लेकिन जाते-जाते ग्रामीणों को जान से मारने की धमकी भी दे गया। इससे ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया।
'क्या शासकीय निस्तार भूमि बेची जा सकती है?'- ग्रामीण
ग्रामीणों ने साफ कहा कि, निस्तार की शासकीय भूमि न बिकी जा सकती है और न ही किसी बाहरी व्यक्ति के नाम दर्ज हो सकती है। उन्होंने राजस्व विभाग पर आरोप लगाया कि-
- ग्रामीणों को छोटे कामों के लिए तहसील कार्यालय में दौड़ाया जाता है
- लेकिन शासकीय भूमि को गलत तरीके से बाहरी व्यक्ति के नाम कर दिया जाता है
- मृतक शाखा राम की सहमति के बिना भूमि हस्तांतरण अवैध है
ग्रामीण आंदोलन की तैयारी में हैं और बाहरी कब्जाधारी को ग्राम से बाहर खदेड़ने की चेतावनी दे रहे हैं।
राजस्व विभाग पर ग्रामीणों की नाराजगी
घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने 'राजस्व विभाग हाय-हाय' के नारे लगाए और विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग नियम बनाता भी खुद है और तोड़ता भी खुद है।