कुश अग्रवाल - बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के बहुचर्चित हनी ट्रैप, ब्लैकमेलिंग और सेक्सटॉर्शन मामले में मुख्य आरोपी संकेत शुक्ला अब भी फरार है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद भी उसकी गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
कोतवाली से 50 मीटर दूर, फिर भी गिरफ्तारी नहीं
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी का निवास स्थान सिटी कोतवाली से करीब 50 मीटर की दूरी पर बताया जा रहा है। इतने नजदीक होने के बावजूद पुलिस उसे पकड़ने में असफल रही है, जिससे आम जनता और विशेषज्ञों में आश्चर्य और आक्रोश दोनों नजर आ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
आरोपी संकेत शुक्ला की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो चुकी है। इसके बाद उसके पास आत्मसमर्पण ही एकमात्र विकल्प बचा है, लेकिन अब तक उसकी ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप
सूत्रों के अनुसार, संकेत शुक्ला को एक प्रभावशाली और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति माना जा रहा है। यही कारण बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई धीमी या असफल दिखाई दे रही है। मामले में पहले ही 9 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस ने कोर्ट में अनुपूरक चालान पेश किया
बलौदा बाजार पुलिस ने जिला सत्र न्यायालय में अनुपूरक चालान पेश करते हुए संकेत शुक्ला को फरार घोषित किया है। न्यायालय में हलफनामा पेश किया गया है और उसकी संपत्ति कुर्क करने संबंधी दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए हैं। इसके बावजूद आरोपी का खुले में घूमना कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
कानून व्यवस्था पर सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस कार्रवाई में कमी है या फिर किसी तरह का दबाव गिरफ्तारी में बाधा बन रहा है। एक फरार आरोपी का इतनी देर तक गिरफ्त से बाहर रहना पुलिस की साख और विश्वसनीयता दोनों को प्रभावित करता है।