Bihar News: बिहार के मधुबनी (जयनगर) में तैनात बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आय से अधिक संपत्ति मामले में घिरे इस इंजीनियर की विदेश में फैली प्रॉपर्टी की जांच के लिए बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने अब इंटरपोल की मदद मांगी है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में नेपाल और पश्चिम बंगाल तक फैली बेनामी संपत्तियों का खुलासा हुआ।
एजुकेशन लोन लेने वाला छात्र कैसे बना 'धनकुबेर'?
मनोज रजक की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है। साल 2009 में नौकरी ज्वाइन करने से पहले मनोज ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए 85,000 रुपये का एजुकेशन लोन लिया था। शुरुआती दिनों में वह लोन की किस्तें चुकाने में भी असमर्थ थे। लेकिन मात्र 17 साल की सरकारी नौकरी में उन्होंने भ्रष्टाचार के जरिए इतनी संपत्ति बना ली कि आज उनके पास करोड़ों के बंगले, जमीन और चाय बागान हैं।
नेपाल में जमीन और दार्जिलिंग में चाय बागान
EOU की छापेमारी में मनोज रजक के पास से करीब दो दर्जन अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। जांच एजेंसी को पता चला है कि आरोपी इंजीनियर ने नेपाल के काठमांडू और सुनसरी में कीमती जमीनें खरीदी हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में चाय बागान और गैस एजेंसी में पार्टनरशिप के सबूत भी मिले हैं। बिहार के दरभंगा, सुपौल और जयनगर स्थित ठिकानों से 3 करोड़ रुपये से अधिक के दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
बिना बताए नेपाल यात्रा और सुरक्षा पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि मनोज रजक ने विभाग को बिना किसी सूचना के कई बार नेपाल की यात्रा की। सरकारी पद पर रहते हुए पड़ोसी देश में इतनी बड़ी संपत्ति बनाना और विदेशी संस्थाओं में निवेश करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी संवेदनशील माना जा रहा है। EOU अब इंटरपोल के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन संपत्तियों का इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि के लिए तो नहीं किया जा रहा था?
EOU ने बिजली कंपनी से मांगा ब्योरा
आर्थिक अपराध इकाई ने बिजली कंपनी को पत्र लिखकर मनोज रजक के 2009 से अब तक के कार्यकाल का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। उनके द्वारा लिए गए हालिया फैसलों और टेंडरों की भी बारीकी से जांच की जा रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि इंटरपोल की मदद से नेपाल और अन्य विदेशी निवेशों की परतों को खोलना आसान हो जाएगा।










