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बिहार कांग्रेस में गुटबाजी तेज हो गई है। प्रदेश नेतृत्व ने असंतुष्ट नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि एआईसीसी सदस्य आनंद माधव ने कहा कि संगठनात्मक दौरे से घबराकर ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।

Bihar Congress: बिहार कांग्रेस में एक बार फिर आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। प्रदेश नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच टकराव तेज होता दिख रहा है। मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि कुछ नेता पार्टी लाइन के खिलाफ गतिविधियों में शामिल हैं और कार्यकर्ताओं को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। जिला इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे लोगों के नाम जल्द से जल्द प्रदेश अनुशासन समिति को भेजे जाएं, ताकि उन पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

जिला भ्रमण को लेकर बढ़ा विवाद
प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि जिन नेताओं के खिलाफ पहले से अनुशासनात्मक प्रक्रिया चल रही है, वे ही इन दिनों जिलों का दौरा कर रहे हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ता ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखें। जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनमें छत्रपति यादव, आनंद माधव, सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी, राजकुमार राजन, नागेंद्र पासवान विकल, मधुरेंद्र कुमार सिंह, प्रद्युम्न यादव, शकीलुर्रहमान, उर्मिला सिंह, नीलू, सुधा मिश्रा, वसी अख्तर, कैसर खान, कुंदन गुप्ता और राजकुमार शर्मा शामिल बताए गए हैं। नेतृत्व का आरोप है कि ये लोग संगठन को कमजोर कर रहे हैं।

'दौरे से भयभीत है नेतृत्व' - आनंद माधव
दूसरी ओर, एआईसीसी सदस्य आनंद माधव ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वे संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से जिलों का दौरा कर रहे हैं और उन्हें कार्यकर्ताओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है। आनंद माधव ने दावा किया कि अब तक सात जिलों का दौरा किया जा चुका है और हर जगह सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश नेतृत्व संवाद करने के बजाय टकराव का रास्ता अपना रहा है। उनके अनुसार, 17 मार्च को पटना में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्य के सभी 40 जिलों से प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। आनंद माधव ने आरोप लगाया कि वर्तमान नेतृत्व मुद्दों से भटक चुका है और बातचीत के बजाय आरोप-प्रत्यारोप में लगा है।

संगठन में सुलह की गुंजाइश?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहर सकता है, खासकर जब असंतुष्ट गुट अपना शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में है। अब सबकी नजर 17 मार्च को प्रस्तावित सम्मेलन और प्रदेश नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी है।

बिहार कांग्रेस में चल रही यह खींचतान आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।

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