Deandra Dottin Obstructing The Field: महिला क्रिकेट में बीते रविवार को एक ऐसा वाकया हुआ जिसने मैच से ज्यादा नियमों की चर्चा छेड़ दी। वेस्टइंडीज की स्टार ऑलराउंडर डिएंड्रा डॉटिनअंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे दुर्लभ तरीकों में से एक-'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' पर आउट दे दी गईं। यह घटना श्रीलंका के खिलाफ दूसरे वनडे के दौरान ग्रेनेडा में देखने को मिली।
इस अनोखे तरीके से आउट होने वाली डॉटिन अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट की छठी खिलाड़ी बन गईं। वहीं पुरुष और महिला क्रिकेट मिलाकर यह 22वां मौका है जब किसी बल्लेबाज़ को इस नियम के तहत आउट दिया गया है।
मैच में वेस्टइंडीज की टीम लक्ष्य का पीछा कर रही थी। श्रीलंका की कप्तान चमारी अट्टापट्टू 30वां ओवर डाल रही थीं। ओवर की आखिरी गेंद लेग साइड पर गई, जिसे अंपायर ने वाइड करार दिया। डॉटिन ने स्वीप खेलने की कोशिश की लेकिन गेंद बल्ले से नहीं लगी।
गेंद विकेटकीपर कौशिनी नूतनगाना के पैड से टकराकर वापस डॉटिन की तरफ उछल गई। इसी दौरान डॉटिन ने बल्ले से गेंद को हल्का सा मारा और फिर अपने हाथ से पकड़ लिया। यह दृश्य थोड़ा अजीब था क्योंकि विकेटकीपर गेंद लेने के लिए आगे बढ़ रही थीं।
डॉटिन 'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' के तहत आउट दी गईं
श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने तुरंत अपील कर दी। अंपायरों ने मामले पर गौर किया और नियमों के आधार पर डॉटिन को 'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' करार देते हुए आउट दे दिया। डॉटिन उस समय 13 रन पर खेल रही थीं।
यह विकेट मैच के लिहाज से भी अहम साबित हुआ। वेस्टइंडीज की टीम 209 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही थी, लेकिन पूरी टीम 48 ओवर में 194 रन पर सिमट गई। मुकाबला श्रीलंका ने जीत लिया।
क्या है 'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' नियम?
क्रिकेट के नियम भी इस मामले में बिल्कुल साफ हैं। क्रिकेट के कानून बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के मुताबिक बल्लेबाज़ गेंद को हाथ से नहीं मार सकता, खासकर तब जब वह हाथ बल्ला नहीं पकड़ रहा हो।
नियम कहता है कि अगर बल्लेबाज़ जानबूझकर गेंद को हाथ या शरीर से रोकता या वापस करता है, और फील्डिंग टीम इसकी अनुमति नहीं देती, तो उसे 'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' दिया जा सकता है।
एमसीसी ने भी साफ किया कि जब तक गेंद खेल में है, वह फील्डिंग टीम की मानी जाती है। अगर बल्लेबाज़ खुद गेंद को छूकर लौटाने की कोशिश करता है तो इससे रन आउट जैसे मौके प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए नियम कड़ा रखा गया है। हालांकि कई बार ऐसी स्थिति में फील्डिंग टीम अपील नहीं करती, लेकिन अगर अपील हो जाए तो अंपायर के पास आउट देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। इस मैच में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।