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Vinayaka Chaturthi 2026 कब है? जानें 21 फरवरी व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, रवि योग, पूजा विधि, चंद्र दर्शन नियम और धार्मिक महत्व।

Vinayaka Chaturthi 2026: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली विनायक चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है। आज के दिन विधि-विधान से व्रत रखकर गणपति बप्पा की आराधना की जाती है। मान्यता है कि विघ्नहर्ता गणेश की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यहां जानें पूजा का शुभ समय क्या रहेगा और इस व्रत का धार्मिक महत्व क्या है?

फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026 की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 20 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से आरंभ होगी और 21 फरवरी 2026 को दोपहर 1 बजे तक रहेगी। लेकिन उदयातिथि के आधार पर व्रत 21 फरवरी 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। चूंकि चतुर्थी तिथि सूर्योदय के समय से शुरु होगी, इसलिए इसी दिन विनायक चतुर्थी का व्रत मान्य होगा।

विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
21 फरवरी को पूजा के लिए विशेष शुभ समय सुबह 11 बजकर 27 मिनट से दोपहर 1 बजे तक रहेगा। इस अवधि में गणेश पूजन, व्रत संकल्प और विशेष अनुष्ठान करना श्रेष्ठ माना गया है। इसके अतिरिक्त इस दिन रवि योग का भी निर्माण हो रहा है, जो सुबह 6 बजकर 55 मिनट से शाम 7 बजे तक प्रभावी रहेगा। रवि योग को शुभ और बाधा निवारणकारी योग माना जाता है। इसलिए पूरे दिन पूजा-पाठ, जप-तप और धार्मिक कार्य करना लाभकारी रहेगा।

चंद्र दर्शन से क्यों बचें?
जहां अधिकांश व्रतों में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है, वहीं विनायक चतुर्थी पर चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से कलंक या मिथ्या आरोप का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि 21 फरवरी की रात चंद्रमा के दर्शन से बचें। यदि भूलवश दर्शन हो जाएं तो गणेश स्तोत्र या “संकटनाशन गणेश स्तोत्र” का पाठ करना शुभ माना जाता है।

पूजन विधि 

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • दूर्वा, लाल पुष्प, मोदक या लड्डू अर्पित करें।
  • “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जप करें।
  • आरती कर प्रसाद वितरित करें।
  • संध्या समय पुनः आरती कर भगवान से सुख-समृद्धि और विघ्नों की शांति की प्रार्थना करें।

विनायक चतुर्थी का धार्मिक महत्व
विनायक चतुर्थी को अत्यंत फलदायी व्रतों में से एक माना गया है। यह व्रत विशेष रूप से कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए किया जाता है। भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और सफलता का देवता माना गया है। उनकी उपासना से व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। जो लोग करियर, शिक्षा, व्यवसाय या पारिवारिक जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है। श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और उन्नति के द्वार खुलते हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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