PM-CM Meeting: ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ 'टीम इंडिया' भावना के साथ संवाद किया। बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह संकट लंबा खिंच सकता है, इसलिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा।
करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि जिस तरह 6 साल पहले कोरोना काल में केंद्र और राज्यों ने 'टीम इंडिया' बनकर काम किया था, आज फिर उसी जज्बे की जरूरत है।
उन्होंने राज्यों को सख्त निर्देश दिए कि वे अपने यहाँ किसी भी तरह का 'पैनिक' न फैलने दें और अफवाहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
60 दिनों का 'सुरक्षा कवच' और तेल की निर्बाध सप्लाई
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत के पास वर्तमान में 60 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार सुरक्षित है। पीएम ने मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया कि होमुर्ज़ में तनाव के बावजूद भारत के पास ईंधन और गैस की पर्याप्त उपलब्धता है।
उन्होंने राज्यों से कहा कि वे जनता के बीच यह विश्वास जगाएं कि पेट्रोल-डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं होने वाली है, ताकि लोग अनावश्यक 'पैनिक बाइंग' न करें।
सरकार ने 7 अधिकार प्राप्त समूह बनाए हैं जो सीधे तौर पर ईंधन, उर्वरक, रसद और महंगाई की निगरानी करेंगे। पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि जिस तरह हमने कोरोना काल में मिलकर लड़ाई जीती थी, उसी तरह इस आर्थिक और सुरक्षा संकट का भी सामना करना है।
ये हैं वो '7 सूत्रीय कवच' जो देश की सुरक्षा करेंगे:
1. ऊर्जा सुरक्षा और तेल भंडार (Energy & Oil Reserve Management):
यह समूह सुनिश्चित करेगा कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। भारत के पास फिलहाल 60 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है। यह समूह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की निगरानी करेगा और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर अन्य देशों से तेल आयात की संभावनाओं पर काम करेगा।
2. आवश्यक वस्तु और महंगाई नियंत्रण (Price Control of Essential Goods):युद्ध के कारण माल ढुलाई महंगी हो सकती है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का खतरा है। यह कवच राज्यों के साथ मिलकर जमाखोरी और कालाबाजारी पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दाल, चीनी, खाद्य तेल और अनाज की कीमतों को स्थिर रखने की जिम्मेदारी इस समूह की होगी।
3. उर्वरक और कृषि सुरक्षा (Fertilizer & Agri-Supply Chain):
भारत अपनी खाद की जरूरतों के लिए एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। रबी सीजन की फसलों को नुकसान न हो, इसके लिए यह समूह उर्वरक (Fertilizer) की निर्बाध सप्लाई और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देगा, ताकि किसानों पर युद्ध का कोई आर्थिक बोझ न पड़े।
4. 'ऑपरेशन सुरक्षा' - प्रवासी भारतीय (Safety of Indian Diaspora):
गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में यह समूह खाड़ी देशों में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। यह राज्यों के साथ मिलकर प्रवासियों का डेटाबेस तैयार करेगा और जरूरत पड़ने पर बड़े पैमाने पर सुरक्षित निकासी (Evacuation) की योजना को अंजाम देगा।
5. आंतरिक सुरक्षा और अफवाहों पर लगाम (Internal Security & Anti-Rumor Cell):
युद्ध के समय 'फ्यूल शॉर्टेज' या 'आर्थिक मंदी' जैसी भ्रामक खबरें समाज में पैनिक पैदा कर सकती हैं। यह समूह सोशल मीडिया की निगरानी करेगा और गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना इसकी प्राथमिकता होगी।
6. लॉजिस्टिक्स और शिपिंग रूट्स (Logistics & Alternative Shipping Routes):
चूंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट है, इसलिए यह समूह भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित समुद्री गलियारे और वैकल्पिक व्यापारिक रास्तों (जैसे ओमान या चाबहार के जरिए) का प्रबंधन करेगा। इससे भारत का निर्यात और आयात पूरी तरह ठप नहीं होगा।
7. वित्तीय स्थिरता और बाजार सुरक्षा (Financial Stability & Market Shield):
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और रुपये की गिरती कीमत को संभालने के लिए वित्त मंत्रालय और आरबीआई (RBI) के अधिकारियों का यह समूह काम करेगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि युद्ध के कारण भारत की विकास दर (GDP) प्रभावित न हो और विदेशी निवेश बना रहे।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर 'जीरो टॉलरेंस'
प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों को आगाह किया कि कुछ असामाजिक तत्व युद्ध की आड़ में जरूरी सामानों के दाम बढ़ा सकते हैं। उन्होंने राज्यों को 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' का कड़ाई से पालन करने और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने को कहा।
पीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि दाल, चावल, खाद्य तेल और खाद जैसी बुनियादी चीजों की सप्लाई चेन में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को सफल बनाना पूरी तरह राज्यों की जिम्मेदारी है।
'ऑपरेशन सुरक्षा' और प्रवासियों की वापसी का प्लान
बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शिरकत की। राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बने इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप ने प्रवासियों की सुरक्षा पर अपनी रिपोर्ट पेश की। प्रधानमंत्री ने उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सीधा संवाद किया जहां से बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में रहते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास वहां फंसे नागरिकों की मदद के लिए 24 घंटे सक्रिय हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना और वायुसेना को 'स्टैंडबाय' पर रखा गया है।