PM-CM Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम 6:30 बजे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के कारण भारत पर पड़ने वाले आर्थिक और सुरक्षा संबंधी प्रभावों की समीक्षा करना है।
प्रधानमंत्री ने इस संकट से निपटने के लिए 'टीम इंडिया' का वही फॉर्मूला अपनाया है, जिसका उपयोग कोरोना महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए किया गया था।
इस वर्चुअल मीटिंग में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हैं। यह बैठक केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी अहम है, क्योंकि इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री भी जुड़े हुए हैं।
हालांकि इस बैठक में चुनाव वाले राज्यों (तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी) राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं नहीं हैं।
बैठक का मुख्य केंद्र युद्ध के कारण भारत में ईंधन की सप्लाई, महंगाई पर नियंत्रण और खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा है।
ईंधन और जरूरी वस्तुओं की किल्लत को रोकना पहली प्राथमिकता
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। हॉर्मुज में तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिससे आने वाले समय में ईंधन की कमी की आशंका जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री मुख्यमंत्रियों को निर्देश दे रहे हैं कि राज्यों में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त लगाम लगाई जाए। सरकार ने साफ किया है कि भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार (करीब 60 दिनों का स्टॉक) मौजूद है, इसलिए जनता को घबराने या 'पैनिक बाइंग' करने की जरूरत नहीं है।
खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और सुरक्षित वापसी
पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार बेहद गंभीर है। प्रधानमंत्री इस बैठक में राज्यों से उन नागरिकों का डेटा और समन्वय बढ़ाने को कह रहे हैं जो युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हो सकते हैं।
बैठक में विदेश मंत्रालय द्वारा एक विस्तृत ब्रिफिंग दी जा रही है कि कैसे भारतीय दूतावास वहां फंसे लोगों की मदद कर रहे हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो बड़े पैमाने पर निकासी की योजना पर भी राज्यों के साथ चर्चा की जा रही है, ताकि उनके लौटने पर राज्य स्तर पर तुरंत सहायता दी जा सके।
महंगाई पर लगाम और आर्थिक झटकों से बचाव की तैयारी
युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर माल ढुलाई और अंततः खाने-पीने की चीजों के दाम पर पड़ता है। प्रधानमंत्री ने राज्यों से आग्रह किया है कि वे अपनी कर संरचना और स्थानीय रसद को इस तरह प्रबंधित करें कि आम आदमी पर महंगाई का बोझ कम से कम पड़े।
केंद्र ने हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर एक बड़ा कदम उठाया है और अब राज्यों से भी इसी तरह की 'नागरिक-केंद्रित' पहल करने की उम्मीद की जा रही है।
अफवाहों और आंतरिक सुरक्षा पर पैनी नजर
वर्चुअल मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर फैल रही लॉकडाउन और ईंधन की कमी जैसी अफवाहों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वे अपने-अपने राज्यों में पुलिस और प्रशासन को अलर्ट रखें ताकि गलत सूचनाओं के कारण समाज में अस्थिरता न फैले।
'टीम इंडिया' के इस मिशन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बाहरी युद्ध का असर भारत की आंतरिक शांति और विकास की रफ्तार पर न पड़े।










