Assam Election: असम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है।
उन्होंने कांग्रेस की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस अब भारत में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "कांग्रेस भारत में अपनी सरकार नहीं बना सकती, वे चाहें तो पाकिस्तान या बांग्लादेश में जाकर अपनी सरकार बना सकते हैं।" सीएम सरमा के इस बयान ने राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस और गौरव गोगोई पर 'पाकिस्तानी कनेक्शन' का आरोप
मुख्यमंत्री सरमा ने केवल बयानबाजी ही नहीं की, बल्कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि गौरव गोगोई और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के तार पाकिस्तान से जुड़े हो सकते हैं।
सरमा ने आरोप लगाया कि गौरव गोगोई ने अतीत में पाकिस्तान की यात्रा की थी और उनके पास राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर संदेह करने के पर्याप्त कारण हैं। सीएम ने यहाँ तक कहा कि "बांग्लादेशी घुसपैठियों" को छोड़कर असम की पूरी जनता बीजेपी के साथ है और कोई भी स्वाभिमानी असमिया अब कांग्रेस में नहीं रहना चाहता।
विपक्ष का पलटवार: 'हार के डर से ध्रुवीकरण कर रहे मुख्यमंत्री'
हिमंत बिस्वा सरमा के इन तीखे हमलों पर कांग्रेस ने भी जोरदार पलटवार किया है। गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री के आरोपों को "दिमागी फितूर" और "सी-ग्रेड सिनेमा की कहानी" करार दिया है। गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय का राजनीतिकरण कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी राज्य में 'डर की राजनीति' कर रही है और जनता अब बदलाव के लिए तैयार है। कांग्रेस का दावा है कि इस बार उनकी 'असम सम्मिलित मोर्चा' (ASM) गठबंधन राज्य में भारी बहुमत के साथ वापसी करेगी।
चुनावी रण और 9 अप्रैल की अग्निपरीक्षा
असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है, जिसके नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। बीजेपी जहाँ तीसरी बार लगातार सत्ता में आने के लिए 'सांस्कृतिक पहचान और विकास' के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस बेरोजगारी और महंगाई को हथियार बना रही है।
इस बार का चुनाव परिसीमन के बाद पहला विधानसभा चुनाव है, जिससे कई सीटों के समीकरण बदल गए हैं। सीएम सरमा खुद अपनी पारंपरिक सीट जालुकबारी से छठी बार मैदान में हैं, जबकि गौरव गोगोई पहली बार विधानसभा चुनाव लड़कर अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
असमिया पहचान और ध्रुवीकरण का मुद्दा
चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री लगातार 'मिया' राजनीति और जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य की स्वदेशी संस्कृति की रक्षा के लिए वे अगले 30 वर्षों तक 'ध्रुवीकरण की राजनीति' करने के लिए तैयार हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने रायजोर दल और एजेपी (AJP) जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर असमिया उप-राष्ट्रवाद और समावेशी विकास का कार्ड खेला है। अब देखना यह होगा कि असम की जनता विकास के दावों पर मुहर लगाती है या सरहद पार के इन तीखे जुबानी हमलों का असर वोटिंग मशीनों पर दिखता है।