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45 की उम्र के बाद अगर शरीर में अचानक बदलाव महसूस होने लगें- जैसे अनियमित पीरियड्स, हॉट फ्लैशेस, नींद की कमी या मूड स्विंग्स, तो यह मेनोपॉज की शुरुआत हो सकती है। सही जानकारी और समय पर देखभाल से इस दौर को आसान बनाया जा सकता है।

Menopause Health Tips: 45 वर्ष की उम्र के बाद यदि महिलाओं को अनियमित पीरियड्स, अनिद्रा, रात में पसीना आना या अचानक घबराहट महसूस होने लगे, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह मेनोपॉज का संकेत हो सकता है। मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक चरण है, जिसमें शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन का स्राव कम होने लगता है और मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सही जानकारी और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस दौर को सहज बनाया जा सकता है।

क्या है पेरिमेनोपॉज?

मेनोपॉज से पहले का चरण पेरिमेनोपॉज कहलाता है। यह अवधि कई महीनों से लेकर तीन-चार वर्षों तक रह सकती है। इस दौरान महिलाओं को कई शारीरिक और मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है।

शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:

  • हॉट फ्लैशेस: अचानक शरीर में गर्मी की लहर, पसीना और दिल की धड़कन तेज होना
  • नाइट स्वेट्स: रात में अधिक पसीना आना, जिससे नींद प्रभावित होती है
  • वेजाइनल ड्राइनेस: योनि में सूखापन और जलन, जिससे संबंध बनाते समय दर्द
  • मूड स्विंग्स: चिड़चिड़ापन, उदासी, एकाग्रता में कमी
  • अनियमित पीरियड्स, सिरदर्द और जोड़ों में दर्द

यदि मेनोपॉज समय से पहले शुरू हो जाए, तो लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं क्योंकि हार्मोन की कमी जल्दी शुरू हो जाती है।

मेनोपॉज के बाद की समस्याएं

मेनोपॉज के बाद की अवधि पोस्टमेनोपॉज कहलाती है। इस समय कुछ लक्षण कम हो सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।

1. हृदय रोग का खतरा
एस्ट्रोजन हार्मोन रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाए रखने और कोलेस्ट्रॉल संतुलित करने में मदद करता है। इसकी कमी से हृदय रोग की आशंका बढ़ सकती है।

2. ऑस्टियोपोरोसिस
हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेनोपॉज के बाद महिलाओं की बोन डेंसिटी लगभग 25% तक घट सकती है। खासकर रीढ़ और कूल्हों में दर्द की शिकायत आम है।

3. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई)
वेजाइनल ड्राइनेस और संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।

4. मेटाबॉलिज्म में बदलाव
वजन बढ़ना, मेटाबॉलिज्म धीमा होना और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

5. मानसिक स्वास्थ्य पर असर
कुछ महिलाओं में आत्मविश्वास में कमी, उदासी, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसे लक्षण भी देखे जाते हैं।

किन बातों का रखें विशेष ध्यान?

  • हेवी ब्लीडिंग को नजरअंदाज न करें: अनियमित या हल्की ब्लीडिंग सामान्य हो सकती है, लेकिन कई दिनों तक अत्यधिक रक्तस्राव होने पर तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
  • कैल्शियम युक्त आहार लें: दूध और दुग्ध उत्पाद हड्डियों को मजबूती देते हैं।
  • विटामिन-डी जरूरी है: प्रतिदिन कम से कम 20–30 मिनट धूप लें।
  • इम्यूनिटी बढ़ाएं: संतरा, मौसंबी, आंवला और अंगूर जैसे विटामिन-सी युक्त फलों का सेवन करें।
  • प्रोटीन और आयरन शामिल करें: दालें, अंकुरित अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल खाएं। नॉन-वेज लेने वाली महिलाएं अंडा, मछली और चिकन शामिल कर सकती हैं।
  • तेल-घी और चीनी सीमित करें: अधिक मसालेदार और तैलीय भोजन से परहेज करें।
  • कैंसर स्क्रीनिंग कराएं: मेनोपॉज के बाद ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। नियमित मेमोग्राफी और सर्वाइकल स्क्रीनिंग कराना जरूरी है।
  • सालाना गाइनी चेकअप अनिवार्य: हर वर्ष रुटीन जांच और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।

{मेडिकल एडवाइस: डॉ. माला श्रीवास्तव- सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट (सर गंगाराम हॉस्पिटल, दिल्ली)}

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