Zero Cost EMI: सिर्फ 5000 रुपये महीना- 60 हजार रुपये का फोन अचानक सस्ता लगने लगा। जीरो-कॉस्ट ईएमआई का यही जादू है। दावा सीधा है- किस्तों में भुगतान करें, कोई ब्याज नहीं। लेकिन असली कहानी थोड़ी अलग है।
सबसे पहले समझिए कि जीरो-कॉस्ट ईएमआई में ब्याज गायब नहीं होता, बस इधर-उधर शिफ्ट कर दिया जाता है। बैंक लोन पर ब्याज लगाता है लेकिन ब्रांड या सेलर उतनी ही रकम का डिस्काउंट दे देता है, जिससे कागज पर आपका कुल भुगतान एमआरपी के बराबर दिखता है। यानी ब्याज नहीं का मतलब अक्सर 'स्पष्ट ब्याज नहीं' होता है।
यहां से शुरू होती है छुपी लागत। अधिकतर बैंकों या कार्ड जारी करने वाले संस्थानों की ओर से प्रोसेसिंग फीस ली जाती है- आमतौर पर खरीद मूल्य का 1 से 3% तक, साथ में जीएसटी भी लगता है। 60000 रुपये की खरीद पर 600 से 1800 रुपये तक जेब से पहले ही निकल सकते हैं। यह रकम अक्सर नॉन-रिफंडेबल होती है और चेकआउट पर बड़े अक्षरों में नहीं दिखती।
दूसरी बात, ब्याज भले ही एडजस्ट हो, उस पर जीएसटी अलग से लग सकता। कई बार यह आपके कार्ड स्टेटमेंट में छोटे-छोटे मासिक चार्ज के रूप में दिखता। 6 या नौ महीनों में ये छोटी रकम जुड़कर बड़ा असर डाल सकती है।
तीसरा झटका-आपने शायद वह डिस्काउंट छोड़ दिया जो कैश या यूपीआई से मिल सकता था। कई सेलर जीरो-कॉस्ट ईएमआई चुनते ही इंस्टेंट डिस्काउंट हटा देते हैं। वही प्रोडक्ट 60 हजार में ईएमआई पर और 55 हजार में एकमुश्त मिल सकता है। यह 5000 रुपये ही असली 'किस्त की कीमत' है-बिना ब्याज लिखे भी लागत तो है।
क्रेडिट कार्ड लिमिट पर असर भी समझिए। 1 लाख की लिमिट में 60 हजार की ईएमआई ली तो आपकी उपलब्ध लिमिट तुरंत 40 हजार रह जाएगी। यह लिमिट किस्त चुकाने के साथ धीरे-धीरे नहीं खुलती। इमरजेंसी, ट्रैवल या दूसरे खर्चों के लिए आपका लचीलापन कम हो जाता है।
और अगर आप ईएमआई जल्दी बंद करना चाहें? कई बैंक फोरक्लोज़र फीस लेते हैं। कुछ मामलों में शुरुआती मर्चेंट डिस्काउंट रिवर्स हो सकता है। पहले से दिया गया जीएसटी आमतौर पर वापस नहीं मिलता। यानी प्लान बदलते ही 'जीरो-कॉस्ट' का गणित बिगड़ सकता है।
फिर भी, हर बार यह नुकसान नहीं है। अगर प्रोसेसिंग फीस नहीं है, कोई डिस्काउंट नहीं छूट रहा, और आप उसी कीमत पर वैसे भी खरीदने वाले थे, तो किस्तों में भुगतान कैश फ्लो संभालने में मदद कर सकता है, बस शर्त यही है कि आप अनुशासित हों।
खरीदने से पहले बस एक सवाल पूछें कि क्या आज पूरा भुगतान करूं तो सस्ता पड़ेगा? अगर जवाब हां है, तो जीरो-कॉस्ट ईएमआई असल में शून्य नहीं है, बस बेहतर पैकेजिंग है।
(प्रियंका कुमारी)