Stock Market: शेयर बाजार में शुक्रवार को फिर गिरावट देखने को मिली। एक दिन की राहत के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई और बाजार दबाव में आ गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की चाल को कमजोर कर दिया।
दोपहर करीब 1 बजे बीएसई सेंसेक्स 600 अंक गिरकर यानी 0.77 फीसदी गिरकर 79406 के आसपास कारोबार कर रहा था। निफ्टी-50 भी 160 से अधिक अंक यानी 0.70 फीसदी फिसलकर 24580 के आसपास था। हालांकि गिरावट के बीच बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही। लगभग 2063 शेयर बढ़त में रहेजबकि 1265 शेयरों में गिरावट आई और 177 शेयर बिना बदलाव के कारोबार करते दिखे।
इन सेक्टरों में दिखी कमजोरी
निफ्टी के ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी, धातु और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं से जुड़े शेयरों में कुछ मजबूती दिखाई दी।वहीं व्यापक बाजार अपेक्षाकृत मजबूत रहा। निफ्टी स्मॉलकैप-100 और निफ्टी मिडकैप-100 दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल
निफ्टी 50 के शेयरों में आईसीसीआईसीआई बैंक, मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट और बजाज फिनसर्व में करीब 2 फीसदी की गिरवट देखी गई। दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयरों में करीब 2.5 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज हुई।
बाजार गिरने की 5 बड़ी वजह
1 पश्चिम एशिया में तनाव: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का डर है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
2 वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत: एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरा हुआ था। वहीं अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को कमजोरी के साथ बंद हुए थे।
3 विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को करीब 3752 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। मार्च महीने में अब तक वे लगभग 16000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं।
4 कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल गुरुवार को लगभग 5 प्रतिशत उछलकर 86.28 डॉलर प्रति बैरल के 20 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। शुक्रवार सुबह यह करीब 84.4 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की बढ़त आई है, लेकिन यह पहले के बड़े भू-राजनीतिक संकटों जितनी तेज नहीं है।
5 बैंकिंग शेयरों में दबाव: बैंकिंग शेयरों में भी गिरावट देखी गई। बैंक निफ्टी करीब 1 प्रतिशत नीचे कारोबार करता नजर आया, जबकि सरकारी और निजी बैंकों के सूचकांक भी 1 प्रतिशत से ज्यादा टूटे।
भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो सकता है, जिसका असर बैंकिंग शेयरों पर पड़ता है। फिलहाल बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी है। अगर ब्रेंट 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंचता है तो वैश्विक बाजारों में और दबाव देखने को मिल सकता है।
(प्रियंका कुमारी)