सोशल मीडिया से होने वाली कमाई पर टैक्स देना जरूरी है। आय को बिजनेस या प्रोफेशन के तहत गिना जाता। सही आईटीआर फॉर्म और जीएसटी नियमों का पालन जरूरी है।

आज के समय में यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म कमाई का बड़ा जरिया बन चुके। कंटेंट क्रिएटर्स विज्ञापन, ब्रांड डील, एफिलिएट मार्केटिंग और फैन सपोर्ट के जरिए अच्छी आमदनी कर रहे। लेकिन यह कमाई टैक्स-फ्री नहीं। आयकर नियमों के मुताबिक, सोशल मीडिया से होने वाली हर कमाई को इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाना जरूरी है।

किन-किन तरीकों से होती कमाई?
क्रिएटर्स की आमदनी कई जरिए से होती है। इसमें यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म से एड रेवेन्यू, ब्रांड्स के साथ स्पॉन्सर्ड पोस्ट, एफिलिएट लिंक से कमीशन, फैंस से मिलने वाले सुपर चैट या मेंबरशिप और खुद के प्रोडक्ट या मर्चेंडाइज की बिक्री शामिल है।

टैक्स के तहत कैसे गिनी जाती है यह इनकम?
आयकर अधिनियम 1961 के तहत, अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से कंटेंट बनाकर कमाई कर रहा, तो इसे बिजनेस या प्रोफेशन से आय माना जाता है। यानी इस पर उसी स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा, जिसमें व्यक्ति आता है। अगर कमाई कभी-कभार हो रही है, तो कुछ मामलों में इसे 'अन्य स्रोत से आय' भी माना जा सकता।

फ्री गिफ्ट और प्रोडक्ट भी टैक्स के दायरे में
कई बार ब्रांड्स प्रमोशन के बदले क्रिएटर्स को महंगे गिफ्ट जैसे मोबाइल, कपड़े या कॉस्मेटिक्स देते हैं। अगर क्रिएटर ये प्रोडक्ट अपने पास रखता है, तो उसकी मार्केट वैल्यू को आय माना जाएगा। सेक्शन 194R के तहत, अगर इन गिफ्ट की कीमत साल में 20000 रुपये से ज्यादा है, तो कंपनी 10% टीडीएस भी काट सकती।

जीएसटी भी देना पड़ सकता
अगर किसी क्रिएटर की सालाना कमाई 20 लाख रुपये से ज्यादा हो जाती है, तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी हो जाता है। इसके बाद ब्रांड प्रमोशन या स्पॉन्सरशिप जैसी सेवाओं पर करीब 18 फीसदी GST लगाना होता है।

कौन सा आईटीआर फॉर्म भरें?
सोशल मीडिया से कमाई करने वाले लोग आमतौर पर दो तरह के आईटीआर फॉर्म भरते हैं। छोटे क्रिएटर्स, जो प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम अपनाते हैं, वे आईटीआर-4 भर सकते हैं। इसमें बिना ज्यादा हिसाब-किताब के एक तय प्रतिशत पर टैक्स लगता है। वहीं, जिनकी कमाई ज्यादा है या जो पूरा अकाउंट रखते हैं, उन्हें ITR-3 फाइल करना होता है।

किन बातों का रखें ध्यान?
क्रिएटर्स को अपनी हर कमाई का रिकॉर्ड रखना चाहिए- चाहे वह एड रेवेन्यू हो, ब्रांड डील हो या गिफ्ट। इसके साथ ही खर्चों का हिसाब भी जरूरी है, जैसे कैमरा, लैपटॉप, सॉफ्टवेयर आदि। इन खर्चों को आय से घटाकर टैक्स बचाया जा सकता है।

कुल मिलाकर, सोशल मीडिया से कमाई आसान जरूर है, लेकिन टैक्स नियमों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सही जानकारी और प्लानिंग से आप कानूनी तरीके से टैक्स बचत भी कर सकते हैं।

(प्रियंका कुमारी)