New Car: नई कार खरीदना हर किसी के लिए एक बड़ा फैसला होता है, लेकिन सिर्फ मॉडल और फीचर्स चुनना ही काफी नहीं है। सही पेमेंट ऑप्शन समझना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि यह आपकी फाइनेंशियल कंडीशन पर सीधा असर डालता है—खासकर पहली बार कार खरीदने वालों के लिए।
क्या पूरी रकम कैश में दे सकते हैं?
भारत में आप बिना लोन के कार खरीद सकते हैं, लेकिन पूरी रकम कैश में देना संभव नहीं है। आयकर नियमों के अनुसार, एक ट्रांजैक्शन में 2 लाख रुपए से ज्यादा कैश देना मना है। इसके अलावा 10 लाख रुपए से ज्यादा की कार पर 1% टीसीएस लगता है और ₹5 लाख से ऊपर की खरीदारी पर PAN कार्ड जरूरी होता है। इन नियमों का मकसद बड़े लेनदेन को पारदर्शी बनाना है।
पूरी पेमेंट के सुरक्षित तरीके
अगर आप लोन नहीं लेना चाहते, तो बैंक ट्रांसफर (NEFT, RTGS, IMPS) सबसे सुरक्षित और तेज विकल्प है। इसके अलावा डिमांड ड्राफ्ट, बैंकर्स चेक और अकाउंट पेयी चेक भी इस्तेमाल किए जाते हैं। UPI और डेबिट कार्ड आमतौर पर बुकिंग या आंशिक भुगतान के लिए ही उपयोगी होते हैं।
फुल पेमेंट के फायदे और नुकसान
पूरी रकम एक साथ चुकाने का सबसे बड़ा फायदा है कि आपको कोई ब्याज नहीं देना पड़ता। साथ ही, कार की ओनरशिप तुरंत आपकी हो जाती है और कई बार डीलर डिस्काउंट भी देते हैं। हालांकि, कार एक डेपरीसिएटिंग एसेट है, यानी समय के साथ इसकी कीमत घटती जाती है। इसलिए अपनी पूरी बचत इसमें लगाना हर स्थिति में सही नहीं होता है।
कार लोन क्यों है लोकप्रिय?
आजकल ज्यादातर लोग कार लोन लेना पसंद करते हैं, क्योंकि इससे एक साथ बड़ी रकम देने का दबाव नहीं रहता। बैंक आमतौर पर कार की कीमत का 80–85% तक फाइनेंस करते हैं और बाकी डाउन पेमेंट देना होता है। लोन अवधि 3 से 7 साल तक हो सकती है, जिससे EMI आसानी से मैनेज की जा सकती है।
डाउन पेमेंट कितना होना चाहिए?
एक लोकप्रिय नियम “20-4-10 रूल” है—कम से कम 20% डाउन पेमेंट, 4 साल की लोन अवधि और कुल खर्च आपकी मासिक आय के 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इससे आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग संतुलित रहती है।
क्रेडिट कार्ड से पेमेंट?
क्रेडिट कार्ड से पूरी कार खरीदना आमतौर पर संभव नहीं है। इसे सिर्फ बुकिंग अमाउंट (5–10%) तक ही सीमित रखा जाता है, क्योंकि ट्रांजैक्शन चार्ज और लिमिट्स ज्यादा होती हैं।
कैश vs लोन: क्या है बेहतर?
अगर आपके पास पर्याप्त बचत है, तो फुल पेमेंट सही विकल्प हो सकता है। लेकिन बेहतर कैश फ्लो और निवेश के मौके बनाए रखना चाहते हैं, तो कार लोन ज्यादा समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
(मंजू कुमारी)