Russia-Ukraine War: यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने लिए रूस और अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने मंगलवार (18 फरवरी) को यूक्रेन में शांति वार्ता को आगे बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय टीम बनाने पर सहमति जताई।

Russia-Ukraine War: लगभग तीन साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। लाखों लोगों को बेघर होना पड़ा है, हजारों ने अपनी जान गंवाई है और कई देशों की अर्थव्यवस्था इस युद्ध से बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने युद्ध को खत्म करके शांति बहाल करने की उम्मीद जगा दी है।

रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम
मंगलवार (18 फरवरी) को अमेरिका और रूस के शीर्ष अधिकारियों ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक एक उच्च स्तरीय टीम बनाने पर सहमति जताई। यह बैठक सऊदी अरब में आयोजित हुई, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सहित कई बड़े राजनयिक मौजूद थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इस पहल को अमेरिका की विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले बाइडेन सरकार ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे।

यूक्रेन में शांति बहाल करने के लिए सऊदी अरब में बैठक आयोजित हुई।

लेकिन इस बैठक की सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह रही कि इसमें यूक्रेन को शामिल नहीं किया गया, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।

यूक्रेन को वार्ता से बाहर रखने पर यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की नाराज
इस अहम बैठक में यूक्रेन की अनुपस्थिति ने विवाद खड़ा कर दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर उनके देश को शामिल किए बिना कोई भी निर्णय लिया जाता है, तो वे उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

यूक्रेन क्यों नहीं था शामिल?
यूक्रेन युद्ध का सबसे बड़ा पीड़ित है, लेकिन फिर भी उसे इस वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया। इसे लेकर जेलेंस्की के साथ यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका पर सवाल उठाए हैं कि कहीं वे इस समझौते से बाहर तो नहीं किए जा रहे?

अमेरिका-रूस के बीच बढ़ीं नजदीकियां
अमेरिका और रूस के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। कई प्रतिबंध, कूटनीतिक निष्कासन और लगातार आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह बैठक रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि दोनों देश अपने-अपने दूतावासों में राजनयिक मिशनों को बहाल करेंगे, जिससे अमेरिका और रूस के बीच सीधा संवाद मजबूत हो सके।

ट्रंप और पुतिन की भी हो सकती है मुलाकात
इस वार्ता के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन आमने-सामने बैठेंगे? रूसी विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि अभी तक किसी शिखर वार्ता की कोई तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन इस संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता।