तालिबान ने पहली बार पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर भीषण एयरस्ट्राइक की।

नई दिल्ली : दक्षिण एशिया में युद्ध के बादल गहरा गए हैं। अफगानिस्तान के तालिबान ने रविवार रात पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करते हुए नूर खान मिलिट्री एयरबेस को निशाना बनाया। अंतरराष्ट्रीय सैन्य विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर वायरल सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, तालिबान के आत्मघाती ड्रोन्स और लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के डिफेंस सिस्टम को चकमा देते हुए रावलपिंडी, क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा में एक साथ कोहराम मचाया है। यह हमला पाकिस्तान द्वारा काबुल और बग्राम पर किए गए 'ऑपरेशन डेजर्ट स्ट्राइक' का सीधा और खौफनाक जवाब माना जा रहा है।

​रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर 'ब्लैक आउट': रनवे और हैंगर स्वाहा

​तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उनके 'फतह' स्क्वाड्रन ने रावलपिंडी के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस पर सटीक बमबारी की है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस हमले में एयरबेस के रनवे को भारी नुकसान पहुँचा है और कम से कम दो परिवहन विमान (C-130) मलबे में तब्दील हो गए हैं। हमले के तुरंत बाद पूरे रावलपिंडी में 'ब्लैक आउट' कर दिया गया और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित बंकरों में शिफ्ट करना पड़ा। यह पहली बार है जब तालिबान ने पाकिस्तान के इतने संवेदनशील सैन्य ठिकाने को सीधे चुनौती दी है।

​क्वेटा की 12वीं कोर पर ड्रोन अटैक: कमांड सेंटर हुआ ध्वस्त

​सिर्फ रावलपिंडी ही नहीं, बल्कि बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में तैनात पाकिस्तान की 12वीं कोर (XII Corps) के मुख्यालय पर भी तालिबान ने 'कामिकेज़ ड्रोन्स' से हमला किया। ड्रोन ने सीधे कोर हेडक्वार्टर के ऑपरेशनल रूम को निशाना बनाया, जिससे पाकिस्तान का संचार तंत्र पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो गया है। बलूचिस्तान में सक्रिय बीएलए विद्रोहियों ने भी तालिबान के इस हमले का स्वागत किया है, जिससे पाकिस्तान के लिए दोहरी मुसीबत खड़ी हो गई है।

​'बग्राम' का बदला: पाकिस्तान के 'ऑपरेशन काबुल' की नाकामी

​इस भीषण संघर्ष की आग तब भड़की जब पाकिस्तानी वायुसेना (PAF) ने एक दिन पहले काबुल और ऐतिहासिक बग्राम एयरबेस पर बम गिराने की कोशिश की थी। पाकिस्तान का इरादा तालिबान के एयर एसेट्स को खत्म करना था, लेकिन तालिबान के रूस और चीन निर्मित एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम ने पाकिस्तानी जेट्स को खदेड़ दिया। इसी विफलता के बाद तालिबान ने 'ओपन वॉर' का एलान किया और रावलपिंडी तक पहुँच बना ली।

​तीन मोर्चों पर फंसे आसिम मुनीर: सेना में बगावत के संकेत

​पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के लिए यह समय उनके करियर की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है। पाकिस्तान इस वक्त तीन मोर्चों (Triple Front) पर युद्ध लड़ रहा है:

  1. ​वेस्टर्न फ्रंट: अफगानिस्तान के साथ खुली जंग।
  2. ​इंटरनल फ्रंट: बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में गृहयुद्ध जैसे हालात।
  3. ​ईस्टर्न फ्रंट: भारत के साथ एलओसी पर हाई अलर्ट और तनाव।

सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना के भीतर भी इस युद्ध को लेकर मतभेद उभरने लगे हैं, क्योंकि कई सैनिक अपने ही 'पुराने साथियों' के खिलाफ लड़ने से हिचक रहे हैं।

​तालिबान का बढ़ता एयर-पावर: कहा से आई ये ताकत?

​रक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस तालिबान के पास कभी लड़ाकू विमान नहीं थे, उसने रावलपिंडी तक हमला कैसे किया? रक्षा वेबसाइटों के अनुसार, तालिबान ने पिछले दो वर्षों में अमेरिकी छोड़े गए हेलीकॉप्टरों को रिपेयर किया है और ब्लैक मार्केट से उन्नत तुर्की और ईरानी ड्रोन्स खरीदे हैं। तालिबान की इस 'हाइब्रिड एयरफोर्स' ने पाकिस्तान के पुराने पड़ चुके रेडार सिस्टम को आसानी से मात दे दी।

​वैश्विक परमाणु खतरा: क्या एटमी हथियार सुरक्षित हैं?

​इस युद्ध ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है क्योंकि पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है। यदि तालिबान रावलपिंडी जैसे शहरों के इतने करीब पहुँच जाता है, तो पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा। अमेरिका और चीन दोनों ही स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। तालिबान ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो अगला निशाना इस्लामाबाद का 'रेड जोन' होगा।