यरूशलेम/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरे से ठीक पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 'हेक्सागन गठबंधन' का खाका पेश कर वैश्विक कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। नेतन्याहू के अनुसार, यह गठबंधन मध्य पूर्व में पनप रही कट्टरपंथी ताकतों का मुकाबला करने के लिए एक अनिवार्य सुरक्षा कवच साबित होगा। इस यात्रा के सम्मान में इजरायल की संसद 'नेसेट' को भारतीय तिरंगे के रंगों से रोशन किया गया है, जो दोनों देशों की प्रगाढ़ होती दोस्ती का एक बेमिसाल प्रतीक है।
क्या है नेतन्याहू का 'हेक्सागन गठबंधन'?
इजरायली पीएम ने हालिया कैबिनेट बैठक में इस नए सामरिक गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। नेतन्याहू का लक्ष्य मध्य पूर्व और उसके आसपास के उन देशों को एक साथ लाना है जो चाहे वह शिया हो या सुन्नी के खिलाफ समान विचारधारा रखते हैं।
इस गठबंधन में भारत के अलावा इजरायल, ग्रीस और साइप्रस को 'कोर पार्टनर' के रूप में शामिल किया गया है। यह गठबंधन रक्षा, व्यापार और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए एक बहुपक्षीय मंच के रूप में कार्य करेगा।
नेतन्याहू ने इसे 'कट्टरपंथ के विरुद्ध एक दीवार' करार दिया है, जो लोकतंत्र और स्थिर अर्थव्यवस्था वाले देशों को एक सूत्र में पिरोएगा।
गठबंधन के छह प्रमुख स्तंभ
नेतन्याहू के इस प्रस्ताव में छह प्रमुख देशों और क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने की योजना है:-
- भारत: दक्षिण एशिया की महाशक्ति और तकनीकी केंद्र।
- इजरायल: मध्य पूर्व का सुरक्षा और नवाचार गढ़।
- ग्रीस और साइप्रस: भूमध्य सागर में सुरक्षा और ऊर्जा के रणनीतिक साझीदार।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): आर्थिक निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता का सेतु।
- अमेरिका: वैश्विक सुरक्षा का नेतृत्व और रणनीतिक संरक्षक।
'हेक्सागन' के मुख्य उद्देश्य और रणनीतिक लक्ष्य
कट्टरपंथ का मुकाबला: मध्य पूर्व में बढ़ते शिया और सुन्नी उग्रवाद को रोकने के लिए एक साझा खुफिया तंत्र विकसित करना।
ऊर्जा गलियारा: पूर्वी भूमध्य सागर से लेकर भारत तक एक सुरक्षित ऊर्जा और व्यापार गलियारे का निर्माण करना।
रक्षा नवाचार: 'सीक्रेसी मैकेनिज्म' के तहत लेजर हथियारों, ड्रोन तकनीक और साइबर सुरक्षा में साझा अनुसंधान करना।
समुद्री सुरक्षा: हिंद महासागर से लेकर लाल सागर और भूमध्य सागर तक निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करना।
भारत के लिए इस गठबंधन के मायने
भारत के लिए हेक्सागन गठबंधन में शामिल होना एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। यह भारत को मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था में एक निर्णायक भूमिका प्रदान करता है। इससे भारत को इजरायल की उस अत्याधुनिक रक्षा तकनीक तक पहुंच मिलेगी, जो अब तक केवल कुछ चुनिंदा देशों तक ही सीमित थी। यह गठबंधन पाकिस्तान और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भी सहायक होगा।
क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा का नया वैश्विक ढांचा
विशेषज्ञों का मानना है कि 'हेक्सागन एलायंस' केवल एक सैन्य समझौता नहीं, बल्कि पश्चिम और दक्षिण एशिया के बीच बदलते सामरिक समीकरणों को औपचारिक रूप देने की एक गंभीर कोशिश है। नेतन्याहू ने इसे भविष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया है, क्योंकि यह गठबंधन क्षेत्रीय चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत 'प्रतिरोधक' के तौर पर उभरेगा।
डिफेंस और अत्याधुनिक तकनीक में 'सीक्रेसी मैकेनिज्म' का आगाज
पीएम मोदी की इस यात्रा का एक मुख्य एजेंडा रक्षा सहयोग को अगले स्तर पर ले जाना है। इस दौरान दोनों देशों के बीच एक नया 'सीक्रेसी मैकेनिज्म' विकसित किया जाएगा, जिससे सैन्य सहयोग की कई संवेदनशील श्रेणियां खुलेंगी। इसमें लेजर-आधारित हवाई रक्षा प्रणाली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व समझौते होने की प्रबल संभावना है।
आतंकवाद के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता और 'आई2यू2' (I2U2) का विस्तार
यह नया गठबंधन भारत-इजरायल संबंधों को पूर्व में गठित आई2यू2 (भारत, इजरायल, यूएई और अमेरिका) समूह से भी आगे ले जाने का प्रयास है। नेतन्याहू इस गठबंधन के माध्यम से आतंकवाद के विरुद्ध एक 'जीरो टॉलरेंस' नीति को वैश्विक स्तर पर संस्थागत बनाना चाहते हैं। भारत की इसमें भागीदारी यह सुनिश्चित करेगी कि हिंद-प्रशांत से लेकर मध्य पूर्व तक सुरक्षा व्यवस्था के साझा मानक स्थापित किए जा सकें।
तिरंगे मे रंगा 'नेसेट': कूटनीतिक सम्मान की नई ऊंचाई
पीएम मोदी के स्वागत में इजरायल की संसद 'नेसेट' को रात के समय केसरिया, सफेद और हरे रंगों की रोशनी से सराबोर किया गया। नेसेट के स्पीकर आमिर ओहाना ने इसे पीएम मोदी और भारतीय लोकतंत्र के प्रति इजरायल का सर्वोच्च सम्मान बताया है। यह दृश्य न केवल प्रोटोकॉल का हिस्सा है, बल्कि यह इजरायली जनता के बीच भारत की बढ़ती साख और 'स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आर्थिक गलियारे और ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित भविष्य का रोडमैप
रक्षा के साथ-साथ यह यात्रा आर्थिक मोर्चे पर भी मील का पत्थर साबित होगी। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे को गति देने के लिए इजरायल के साथ तकनीकी साझेदारी पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में इजरायली गैस भंडारों और भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमताओं के बीच तालमेल बैठाने के लिए नए निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।










