मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है इजरायली रक्षा बलों ने शुक्रवार को ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों पर भीषण हमला किया है। इजरायली वायुसेना ने मध्य ईरान के यज्द में स्थित यूरेनियम प्रोसेसिंग फैसिलिटी और अराक के पास खोंदाब भारी जल रिएक्टर को निशाना बनाया।
इस हमले की पुष्टि स्वयं ईरानी मीडिया और अधिकारियों ने की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी है कि इजरायल को अपने इन 'अपराधों' के लिए भारी कीमत चुकानी होगी।
परमाणु ठिकानों और औद्योगिक केंद्रों पर सटीक निशाना
इजरायली वायुसेना द्वारा किए गए इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' में केवल परमाणु केंद्रों को ही नहीं, बल्कि ईरान की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, खुजेस्तान और इस्फाहान में स्थित ईरान के दो सबसे बड़े स्टील प्लांट्स पर भी मिसाइलें दागी गई हैं।
इजरायल का दावा है कि ये ठिकाने सीधे तौर पर ईरान के हथियार निर्माण कार्यक्रम में सहायक थे। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने बताया है कि बुशहर परमाणु संयंत्र के पास भी एक प्रोजेक्टाइल गिरा है, लेकिन फिलहाल किसी रेडियोधर्मी रिसाव या परिचालन में बाधा की सूचना नहीं मिली है।
ईरान का पलटवार और 'होर्मुज पर संकट
इस भीषण हमले के जवाब में ईरान ने भी अपनी आक्रामकता बढ़ा दी है। ईरानी सेना ने आधी रात के बाद इजरायल पर सिलसिलेवार मिसाइल हमले किए, जिसमें तेहरान और बेर्शबा जैसे शहरों में सायरन गूंज उठे। इसके अलावा, ईरान ने सऊदी अरब स्थित अमेरिकी सैन्य बेस 'प्रिंस सुल्तान' पर भी हमला किया, जिसमें कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग Strait of Hormuz को बंद करने की चेतावनी दोहराई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना बढ़ गई है।
डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति और 'अंतिम समय सीमा' का दबाव
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के लिए 10 दिनों की 'डेडलाइन' दी थी। ट्रंप ने हाल ही में अपने संबोधन में होर्मुज जलमार्ग को 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' कहने का मजाक भी किया था, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने व्यापारिक मार्ग नहीं खोले, तो उसके ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर दिया जाएगा।
इजरायल का यह ताजा हमला अमेरिका की कूटनीति और युद्ध के बीच की एक बेहद बारीक रेखा को दर्शाता है। व्हाइट हाउस इस समय इजरायली प्रधानमंत्री और ईरानी नेतृत्व के साथ संपर्क में है ताकि इस संघर्ष को पूर्ण परमाणु युद्ध में बदलने से रोका जा सके।