India-Canada Relations: भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक तल्खी अब खत्म होती नजर आ रही है। कनाडा की सरकार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अब कनाडा में होने वाली हिंसक घटनाओं और अपराधों के तार भारत से नहीं जुड़े हैं। यह बयान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की आगामी भारत यात्रा से ठीक पहले आया है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
कनाडा के रुख में आया बड़ा बदलाव
कनाडा के संघीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि वे अब आश्वस्त हैं कि भारत की संलिप्तता वाली हिंसक गतिविधियां अब कनाडा में नहीं हो रही हैं। टोरंटो स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) के बीच सक्रिय और मजबूत संवाद चल रहा है। अधिकारी ने यह भी कहा कि अगर ऐसी गतिविधियां जारी रहतीं, तो प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा का कोई औचित्य नहीं होता। यह बयान उस समय आया है जब कार्नी मुंबई और नई दिल्ली के नौ दिवसीय दौरे पर आने वाले हैं, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
निज्जर हत्याकांड के बाद बिगड़े थे रिश्ते
जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में भारी गिरावट आई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार के एजेंटों पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे नई दिल्ली ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। इस विवाद के कारण दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था और संबंधों में एक लंबा गतिरोध पैदा हो गया था। हालांकि, अब कनाडा की नई सरकार आर्थिक संबंधों को गहरा करने और 'व्यावहारिक' विदेश नीति अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
NSA स्तर की बातचीत ने बदली तस्वीर
रिश्तों में आए इस सकारात्मक सुधार के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की भूमिका अहम मानी जा रही है। हाल ही में भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने ओटावा का दौरा किया था, जहां उनकी कनाडाई समकक्ष नथाली ड्रौइन और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री के साथ विस्तृत चर्चा हुई। ओटावा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने बताया कि दोनों पक्षों ने सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन एक्शन प्लान तैयार किया है। इसमें नशीले पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध, हिंसक उग्रवाद, साइबर अपराध और अवैध प्रवासन जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने की सहमति बनी है।
कनाडाई सिख समुदाय में मिली-जुली प्रतिक्रिया
एक ओर जहां सरकारें रिश्ते सुधारने में जुटी हैं, वहीं कनाडा के सिख कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने इस नए आकलन की आलोचना की है। कुछ धार्मिक नेताओं का दावा है कि उन्हें अभी भी जान का खतरा है। वहीं, 'सिख फॉर जस्टिस' जैसे समूहों ने पार्लियामेंट हिल पर प्रदर्शन कर भारत के साथ फिर से जुड़ने के सरकारी फैसले का विरोध किया है। इसके बावजूद, ओटावा का मानना है कि व्यापारिक और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना समय की मांग है, खासकर तब जब कनाडा अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने और व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।