समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इटावा में निर्मित भव्य केदारेश्वर मंदिर के जरिए 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पर हैं। 4 महीने बाद होने वाले 'कुंभ अभिषेकम्' से सपा हिंदू मतदाताओं को बड़ा संदेश देने की तैयारी में है।

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने पैतृक क्षेत्र इटावा में भगवान शिव के भव्य केदारेश्वर मंदिर का निर्माण कराया है। केदारनाथ धाम की प्रतिकृति के रूप में तैयार यह मंदिर न केवल वास्तुकला का अद्भुत नमूना है, बल्कि सपा की बदलती राजनीतिक दिशा का भी प्रतीक माना जा रहा है।

मंदिर का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है और इसे पूरी तरह से पत्थर तराश कर बनाया गया है। अखिलेश यादव अक्सर इस मंदिर का दौरा करते हैं और निर्माण की बारीकियों पर खुद नजर रखते हैं। राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि इस मंदिर के जरिए अखिलेश यादव अपनी उस छवि को तोड़ना चाहते हैं जो उन पर विपक्षी दलों द्वारा अक्सर थोपी जाती रही है।

​4 महीने बाद 'कुंभ अभिषेकम्' की भव्य तैयारी और संतों का जमावड़ा 
आगामी चार महीनों के भीतर केदारेश्वर मंदिर में 'कुंभ अभिषेकम्' का भव्य आयोजन प्रस्तावित है। यह धार्मिक अनुष्ठान दक्षिण भारतीय पद्धति के अनुसार संपन्न कराया जाएगा, जिसके लिए विशेष रूप से दक्षिण भारत के प्रकांड पंडितों और विद्वानों को आमंत्रित किया जा रहा है।

अखिलेश यादव की योजना इस आयोजन को एक बड़े उत्सव का रूप देने की है, जिसमें देश भर के प्रतिष्ठित साधु-संतों और धर्माचार्यों को आमंत्रित किया जाएगा। इस मेगा इवेंट के जरिए समाजवादी पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह भी सनातन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों के प्रति उतनी ही गंभीर है, जितनी कि अन्य राजनीतिक दल।

​हिंदू मतदाताओं को साधने के लिए अखिलेश का 'सॉफ्ट हिंदुत्व' कार्ड 
विशेषज्ञों का मानना है कि केदारेश्वर मंदिर और वहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठान अखिलेश यादव के 'सॉफ्ट हिंदुत्व' एजेंडे का हिस्सा हैं। पिछले कुछ चुनावों में सवर्ण और पिछड़े हिंदू मतों के ध्रुवीकरण के कारण सपा को हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक चाल मानी जा रही है।

अखिलेश अब केवल पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की बात नहीं कर रहे, बल्कि मंदिर और मठों के जरिए बहुसंख्यक समाज की आस्था से भी जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। केदारेश्वर मंदिर के बहाने वे यह दिखाना चाहते हैं कि विकास के साथ-साथ वे धार्मिक विरासत के संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

​आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को कितना होगा राजनीतिक लाभ? 
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच इस मंदिर प्रोजेक्ट का महत्व और बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अखिलेश यादव केदारेश्वर मंदिर के जरिए खुद को एक 'शिव भक्त' नेता के रूप में स्थापित करने में सफल रहे, तो इसका सीधा फायदा भाजपा के कोर हिंदू वोटबैंक में सेंध लगाने के रूप में मिल सकता है।

विशेष रूप से यादव और अन्य ओबीसी जातियों के बीच धार्मिक पहचान को मजबूती मिलेगी। हालांकि, विपक्षी दल इसे चुनावी ढोंग करार दे रहे हैं, लेकिन अखिलेश की टीम 'कुंभ अभिषेकम्' को ऐतिहासिक बनाकर जनता के बीच एक अमिट छाप छोड़ने की तैयारी में जुटी है।