अब प्रदेश में दो से अधिक संतान वाले लोग भी पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। राज्य सरकार ने 32 साल पुराने उस कानून को खत्म कर दिया है, जो अब तक ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने से रोकता था।

राजस्थान में राजनीति से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। अब प्रदेश में दो से अधिक संतान वाले लोग भी पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। राज्य सरकार ने 32 साल पुराने उस कानून को खत्म कर दिया है, जो अब तक ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने से रोकता था।

सरकार ने इस नए नियम को तुरंत प्रभाव से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट से जुड़े वित्त विधेयक 2026 को भी लागू कर दिया गया है।

32 साल पुरानी पाबंदी खत्म
यह नियम करीब तीन दशक पहले लागू किया गया था। उस समय सरकार का मकसद जनसंख्या नियंत्रण था। इसके तहत जिन लोगों के दो से ज्यादा बच्चे होते थे, उन्हें पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता था।

इसका असर खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिला, जहां बड़े परिवार आम हैं। कई स्थानीय और प्रभावशाली नेता इस नियम के चलते चुनाव नहीं लड़ पाए।

अब खुद लड़ सकेंगे चुनाव
पुराने नियम के कारण कई नेता अपने परिवार के किसी सदस्य को चुनाव लड़वाते थे और खुद पर्दे के पीछे से फैसले लेते थे। इससे पंचायतों में परोक्ष रूप से शासन चलने जैसी स्थिति बन जाती थी।

लेकिन अब यह रोक हटने के बाद वे खुद चुनाव मैदान में उतर सकेंगे। इससे राजनीति में पारदर्शिता बढ़ने और मतदाताओं को सीधे प्रतिनिधि चुनने का मौका मिलने की उम्मीद है।

अशांत क्षेत्र विधेयक भी चर्चा में
राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने का फैसला किया है। इसे आम तौर पर “अशांत क्षेत्र विधेयक” कहा जाता है।

इस विधेयक में दंगा या सामुदायिक तनाव वाले इलाकों में जमीन और मकानों की खरीद-फरोख्त पर सख्ती करने का प्रावधान है। चूंकि यह मामला केंद्रीय कानून से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी होगी।

ये नए कानून भी लागू
राज्य में कई अन्य महत्वपूर्ण कानून और संस्थान भी लागू किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  1. अजमेर में योग, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी विश्वविद्यालय
  2. जयपुर में महाराणा प्रताप खेल विश्वविद्यालय
  3. राजस्थान जन विश्वास संशोधन अधिनियम
  4. राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान संशोधन अधिनियम
  5. वित्त विधेयक 2026
  6. विनियोग विधेयक 2026

क्या बदलेगा अब?
इस फैसले से पंचायत और निकाय चुनावों में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही, लंबे समय से राजनीति से बाहर रहे कई नेता अब फिर से सक्रिय हो सकते हैं।