सिंगरौली नगर निगम की परिषद बैठक में महापौर और कमिश्नर के बीच फाइलों के निस्तारण और अधिकारों को लेकर तीखी बहस हुई। बयानबाजी के बाद माहौल गरमा गया और अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा। जानिए क्या है पूरा घटनाक्रम...

सिंगरौली। नगर निगम में महापौर और निगम कमिश्नर के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। परिषद की बैठक के दौरान दोनों के बीच जिस तरह तीखी बहस हुई, उसने प्रशासनिक तंत्र में चल रही खींचतान को उजागर कर दिया। बैठक सामान्य एजेंडे के साथ शुरु हुई लेकिन जैसे ही ही फाइलों के निपटारे और निर्णय प्रक्रिया की बात उठी, माहौल अचानक बदल गया गया। महापौर के अधिकार क्षेत्र और फाइलों के निपटारे को लेकर सवाल उठने लगे। यही चर्चा धीरे-धीरे आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

कमिश्नर ने महापौर पर उठाए सवाल
बैठक के दौरान नगर निगम अध्यक्ष ने नियमों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए कमिश्नर से अपनी बात रखने को कहा। इस पर कमिश्नर ने सदन में कहा कि कई महत्वपूर्ण फाइलें समय पर आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, क्योंकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी हो रही है। उनका संकेत महापौर की ओर था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ फाइलें कार्यालय की निर्धारित प्रक्रिया से हटकर बाहर ले जाई जाती हैं, जिससे कामकाज प्रभावित होता है। इस बयान के बाद माहौल और गरम हो गया।

महापौर ने तुरंत दिया इसका जवाब
कमिश्नर ने कहा जब महिलाओं को स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिया गया है, तो उन्हें निर्णय लेने में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने महिला पार्षदों से आग्रह किया कि वे अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझें और परिषद की बैठकों में नियमित रूप से भाग लें। उन्होंने कहा कि नगर निगम में कई महिला पार्षद हैं, लेकिन उनमें से कुछ को उन्होंने पहली बार बैठक में देखा। इन टिप्पणियों के बाद महापौर ने तुरंत प्रतिक्रिया की। उन्होंने कहा नियमों के अनुसार उन्हें किसी भी फाइल को तीन दिन तक अपने पास रखने का अधिकार है।

अध्यक्ष को करना पड़ा हस्तक्षेप
उन्होंने बताया कि वे फाइलों को पढ़ने और समझने के लिए ले जाती हैं। वह बिना पूरी जानकारी के किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं मानतीं। महापौर ने कहा यदि किसी प्रस्ताव में अनियमितता या भ्रष्टाचार की आशंका हो तो उसे रोकना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी भी कई बार फाइलें अपने साथ रखते हैं। ऐसे में केवल महापौर पर सवाल उठाना उचित नहीं है। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया और दोनों पक्षों के समर्थक अपनी-अपनी बात रखने लगे। स्थिति को संभालने के लिए अध्यक्ष को बीच-बचाव करना पड़ा।