मध्यप्रदेश। शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना को हाई कोर्ट ने तीसरी बार फटकार लगाई है। बताया जा रहा है कि, एमपी हाई कोर्ट (इंदौर पीठ) में 25 मार्च को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जयकुमार पिल्लई ने कहा कि, 'उन्हें (शाजापुर कलेक्टर) नियमों की जानकारी नहीं है। वे बिना सोचे समझे आदेश दे देती हैं। '
बताया जा रहा है कि, मामला कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी जयंत बघेरवाल की वेतन वृद्धि पर लगी रोक से जुड़ा है। शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना ने वाहन स्टैंड ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद ठेकेदार ने जयंत बघेरवाल पर आर्थिक लेन-देन के गंभीर आरोप लगाए।
बिना जांच के की कार्रवाई
मामले में कलेक्टर ने बिना जांच के जयंत बघेरवाल के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने फरवरी 2025 में दो आदेश दिए, पहले के माध्यम से जयंत बघेरवाल की वेतन वृद्धि पर रोक लगाई जबकि, दूसरे आदेश से बघेरवाल को एसडीएम कार्यालय गुलाना अटैच कर दिया।
हाई कोर्ट ने स्टे आर्डर पास किया
जयंत बघेरवाल ने कलेक्टर के आदेश के खिलाफ कमिश्नर उज्जैन में अपील की। कमिश्नर ने आदेश यथावत रखा। इसके बाद हाई कोर्ट में अपील की गई। 25 मार्च को हाई कोर्ट ने स्टे आर्डर पास किया। इसी दौरान अदालत ने कलेक्टर के काम काज को लेकर टिप्पणी की।
अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन
हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, 15 दिन के अंदर कलेक्टर ऋजु बाफना को व्यक्तिगत हलफनामा पेश करना होगा। इसमें उन्हें साफ करना होगा कि, आखिर किन नियमों के आधार पर उन्होंने आदेश पारित किए। अदालत ने कलेक्टर की कार्रवाई को उनके अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन माना है।
इन मामलों में भी पड़ी फटकार
इसके पहले दो बार शाजापुर कलेक्टर को हाई कोर्ट से फटकार पड़ चुकी है। पहला मामला 30 जून 2024 का है। इनमें हाई कोर्ट ने कलेक्टर के खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की कार्रवाई की थी। हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद कलेक्टर, CMO ने हाट मैदान में महेश गुप्ता नमक व्याकरति की भूमि से हाट बाजार नहीं हटाया था। दूसरा मामला आबकारी अधिकारी के निलंबन से जुड़ा है। मार्च 2026 में हाई कोर्ट ने आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के निलंबन को गलत ठहराया था और उन्हें फिर से नौकरी पर बहाल किया था।