जबलपुर। एक स्थानीय ओमती थानाक्षेत्र से जुड़े एक संवेदनशील मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत को प्रथम दृष्टया पाया है कि न्यायालयीन रिकॉर्ड के संबंध में भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की गई हो सकती है। न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने ओमती थाना प्रभारी राजपाल सिंह बघेल और एएसआई भल्लूराम चौधरी को 8 अप्रैल को निर्धारित अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद जबलपुर निवासी वीरेंद्र पाण्डेय द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता स्वयं उच्च न्यायालय से जुड़े पद पर कार्यरत बताए जाते हैं। उनका आरोप है कि उनकी शिकायत पर दर्ज एफआईआर को सत्र न्यायालय में चुनौती दी गई थी। इसी दौरान कथित रूप से रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय के नाम से एक फर्जी लिफाफा और नोटिस तैयार कर उसे आधिकारिक तामीली के रूप में प्रस्तुत कर दिया गया। आरोप है कि इस दस्तावेज के आधार पर यह दर्शाया गया कि संबंधित पक्ष को वैधानिक सूचना दे दी गई है, जबकि वास्तविक स्थिति अलग थी।
एकतरफा आदेश और जांच
बताया जाता है इसी कथित फर्जी तामीली के आधार पर सत्र न्यायालय ने एकतरफा आदेश पारित कर दिया। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह न्यायिक प्रक्रिया के साथ गंभीर धोखाधड़ी मानी जाएगी। मामले की शिकायत रजिस्ट्रार जनरल को सौंपे जाने के बाद जिला न्यायाधीश (चतुर्थ) द्वारा प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में कुछ अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई। इसके बाद अदालत ने एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
आरोप यह भी है कि अनुमति मिलने के बावजूद पुलिस ने अपेक्षित गति से कार्रवाई नहीं की। बाद में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी ने हस्तक्षेप कर मामला दर्ज करने का आदेश दिया। अब हाईकोर्ट द्वारा संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब करना इस बात का संकेत है कि न्यायालय इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रहा है। मामले में अगर कहीं गड़बड़ी की पुष्टि हुई तो सख्त कार्रवाई होना तय है।
क्यों अहम है यह सुनवाई?
यह मामला केवल एक एफआईआर या नोटिस का नहीं, बल्कि न्यायिक अभिलेखों की विश्वसनीयता से जुड़ा है। यदि अदालत में फर्जी तामीली दिखाकर आदेश प्राप्त किए जाते हैं, तो इससे न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और आम नागरिकों का भरोसा दोनों प्रभावित होते हैं। 8 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत का रुख इस पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल, कानूनी जगत की नजरें इस मामले पर टिकी हुई हैं।










