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स्थानीय अदालत ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए एक युवती को आईटी एक्ट के तहत एक साल की सजा सुनाई है। आरोपी पर फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर 50 हजार रुपए की मांग की थी।

भोपाल। सोशल मीडिया के लगातार बढ़ते दुरुपयोग पर सख्त संदेश देते हुए एक स्थानीय अदालत ने अपने एक अहम फैसले में प्रिया धाकड़ नामक युवती को आईटी एक्ट के तहत एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। प्रिया पर आरोप था कि उसने फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर 50 हजार रुपए की वसूली का प्रयास किया और सफल नहीं होने पर तस्वीरें हटाने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने जानबूझकर पहचान छिपाई और पीड़ित की छवि खराब करने की नीयत से यह हरकत की।

साइबर अपराध पर कोर्ट का कड़ा रुख
न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आरोपी ने जानबूझकर अपनी पहचान छिपाई। उसने पीड़ित की छवि धूमिल करने की नीयत से फर्जी आईडी तैयार की और दबाव बनाया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के कृत्य समाज में डिजिटल असुरक्षा को बढ़ाते हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि भले ही यह आरोपी का पहला अपराध था, लेकिन अपराध की प्रकृति और उसके प्रभाव को देखते हुए नरमी बरतना उचित नहीं था।

2018 में दर्ज हुआ था मामला
न्यायालय ने इस मामले का फैसला सुनाते हुए स्वीकार किया कि साइबर अपराधों पर सख्त रुख जरूरी है। यह पूरा प्रकरण वर्ष 2018 का है। शिकायत के अनुसार, प्रिया धाकड़ ने सचिन यादव और सुनैना धाकड़ की तस्वीरों का दुरुपयोग किया। इन तस्वीरों के आधार पर एक नकली फेसबुक प्रोफाइल तैयार की गई। फर्जी अकाउंट से परिवारजनों और परिचितों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई। जैसे ही लोगों को शक हुआ, मामला उजागर हो गया। इसके बाद आरोपी ने प्रोफाइल हटाने के बदले 50 हजार रुपए की मांग की।

चचेरी बहन निकली आरोपी
पीड़िता सुनैना धाकड़ ने अदालत में बयान देते हुए बताया कि आरोपी उसकी चचेरी बहन है। उसने कहा कि सचिन अक्सर विदिशा आता-जाता था और कुछ तस्वीरें उसके पास थीं। प्रिया इन तस्वीरों का मजाक उड़ाया करती थी। इन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी आईडी बनाई गई। परिवार के भीतर के विवाद ने साइबर अपराध का रूप ले लिया। इससे पीड़ितों की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

डिजिटल युग में सतर्कता जरूरी
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग गंभीर अपराध है। फर्जी प्रोफाइल बनाना और धन की मांग करना आईटी एक्ट के तहत दंडनीय है। ऐसे मामलों में सख्त सजा से समाज में स्पष्ट संदेश जाता है। न्यायालय ने कहा कि व्यक्तिगत दुश्मनी या मजाक के नाम पर किसी की छवि खराब करना और आर्थिक लाभ लेने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है। यह फैसला साइबर अपराधों के खिलाफ एक चेतावनी की तरह है।

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