भोपाल। स्थानीय भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईसर) में कार्यरत और राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित प्रो डॉ. आर. महालक्ष्मी को फर्जी ईमेल विवाद के बाद संस्थान से हटा दिया गया है। यह फैसला संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) ने विभागीय जांच पूरी होने के बाद लिया। आदेश जारी होते ही उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं और संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट से उनका प्रोफाइल व फोटो भी हटा दिया गया।
यह विवाद दिसंबर 2024 में सामने आया था। आरोप था कि पीएचडी में प्रवेश की इच्छुक कुछ छात्राओं को प्रोफेसरों के नाम से बनाई नकली ई-मेल आईडी के जरिए अश्लील और आपत्तिजनक संदेश भेजे गए। छात्राओं को जब संदेह हुआ, तो उन्होंने संबंधित शिक्षकों से संपर्क किया। जांच में पता चला कि जिन ई-मेल पतों से संदेश भेजे गए, वे असली नहीं थे। इसके बाद 7 दिसंबर 2024 को इस संबंध में औपचारिक शिकायत की गई और पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई।
तत्काल प्रभाव से डॉ. महालक्ष्मी निलंबित
मामला गंभीर होने के कारण संस्थान प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से डॉ. महालक्ष्मी को निलंबित कर दिया और आंतरिक जांच समिति गठित की। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, अभय सक्सेना, से भी स्वतंत्र जांच कराई गई। जांच प्रक्रिया के दौरान डिजिटल साक्ष्यों, ई-मेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की गई। रिपोर्ट में अनियमितताओं और आरोपों की पुष्टि होने के बाद पूरा मामला बीओजी की बैठक में रखा गया, जहां विस्तृत चर्चा के पश्चात बर्खास्तगी का निर्णय लिया गया।
प्रोफेसर ने हाईकोर्ट में दी निलंबन को चुनौती
डॉ. महालक्ष्मी ने अपने निलंबन की अवधि बढ़ाए जाने को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की थी। हालांकि, विभागीय जांच पूरी होने और प्रबंधन के अंतिम निर्णय के बाद उनकी सेवा समाप्ति औपचारिक रूप से लागू कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम का अर्थ यह है कि संस्थान ने छात्राओं की सुरक्षा और संस्थान की साख को सर्वोपरि मानते हुए कठोर कदम उठाया। उच्च शैक्षणिक संस्थानों में नैतिक आचरण, पारदर्शिता और जवाबदेही को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। किसी भी प्रकार की फर्जी गतिविधि या दुराचार के आरोप सिद्ध होने पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करता है।









