साल 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन की आग एक बार फिर सुलग उठी है। हाल ही में सीबीआई अदालत की ओर से पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के आवास को आग लगाने के मामले में 56 आरोपियों को बरी किए जाने के बाद, इस केस में धर्मेंद्र हुड्डा ने सात समुद्र पार अमेरिका से फेसबुक लाइव के जरिए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हुड्डा के इन दावों ने हरियाणा की सियासत में भूचाल ला दिया है।
साजिश के पीछे कांग्रेस के दिग्गज नेता का हाथ ...
अमेरिका से लाइव आए धर्मेंद्र हुड्डा ने सीधा आरोप लगाया कि रोहतक स्थित कैप्टन अभिमन्यु की कोठी को जलाने की पटकथा एक रसूखदार कांग्रेस नेता ने लिखी थी। हुड्डा के अनुसार दंगे के दौरान उस नेता के परिवार से संबंधित पेट्रोल पंप को विशेष रूप से खुला रखा गया था। वहां से केन भर-भरकर पेट्रोल दंगाइयों को बांटा गया, जिसका इस्तेमाल बाद में पूर्व मंत्री के घर को जलाने में किया गया। आरोपी ने साफ कहा कि इस पूरी साजिश का मकसद कैप्टन अभिमन्यु को राजनीतिक और व्यक्तिगत नुकसान पहुंचाना था।
खाप पंचायतों की भूमिका और कैप्टन के बड़प्पन से बरी हुए 56 आरोपी
हुड्डा ने फेसबुक लाइव में स्वीकार किया कि आंदोलनकारियों ने जो कृत्य किए थे, उसके लिए उन्हें कम से कम 20 साल की जेल होनी चाहिए थी। उसने बताया कि यदि आज 56 लोग बरी हुए हैं, तो इसके पीछे विभिन्न खाप पंचायतों, विशेषकर हिसार की सतरोल खाप का बड़ा योगदान है।
हुड्डा के मुताबिक खापों के हस्तक्षेप के कारण ही कैप्टन अभिमन्यु के परिवार ने उन्हें माफ करने का निर्णय लिया। उसने यह भी खुलासा किया कि कुछ लोग कैप्टन को गुमराह कर रहे थे कि वे दिखावे के लिए माफ कर दें और बाद में आरोपियों का 'एनकाउंटर' करवा दें, लेकिन कैप्टन ने बड़े दिल का परिचय देते हुए उन्हें सच्चे मन से क्षमा किया।
बेजुबान कुत्तों को जिंदा जलाया, मैं बचाने गया था
लाइव के दौरान सबसे बड़ा खुलासा बेजुबान जानवरों को लेकर था। धर्मेंद्र ने बताया कि हिंसक भीड़ ने कैप्टन की कोठी में मौजूद तीन कुत्तों को जिंदा जला दिया था। एक कुत्ता जलती हुई हालत में गेट पर फंस गया था, जिसे धर्मेंद्र ने खुद बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। उसने दावा किया कि इसी मानवीय आधार और सीसीटीवी फुटेज के कारण उसे पहले जमानत मिली थी, क्योंकि वह उस घायल जानवर की मदद कर रहा था।
पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए गंभीर सवाल
धर्मेंद्र हुड्डा ने जाट आरक्षण के दौरान हुई पुलिसिया कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए। उसने बताया कि पुलिस ने उन्हें 7-7 दिनों तक उल्टा लटकाकर बेरहमी से पीटा। साथ ही, उसने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा सीबीआई जांच की मांग के कारण कई बेगुनाह लोग इस कानूनी पचड़े में फंस गए।
हुड्डा ने खुलासा किया कि हमले में इस्तेमाल किए गए फरसे और हथियार रोहतक के पास स्थित जसिया गांव से मंगाए गए थे। उसने वकील मनोज दुहन का बचाव कर कहा कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया, जबकि असली दोषी वे लोग थे जिनके घरों से बाद में चोरी के सोने-चांदी के सिक्के और मोबाइल बरामद हुए।
भगोड़ा घोषित धर्मेंद्र हुड्डा कभी एक होनहार छात्र था
रोहतक के खिड़वाली गांव का रहने वाला धर्मेंद्र हुड्डा कभी एक होनहार छात्र था। उसने 'मास्टर्स ऑफ टूरिज्म' की पढ़ाई पूरी की थी और 2015 में रेलवे (IRCTC) में उसकी नौकरी भी लग गई थी, लेकिन 2016 के आंदोलन ने उसकी जिंदगी बदल दी।
• पहली गिरफ्तारी: 29 फरवरी 2016 को इस मामले में पहली गिरफ्तारी धर्मेंद्र की ही हुई थी।
• शिक्षा और संघर्ष: जेल से बाहर आने के बाद उसने कानून (LLB) की पढ़ाई शुरू की।
• किसान आंदोलन: वह किसान आंदोलन के दौरान भी काफी सक्रिय रहा और कई बड़े नेताओं व फिल्मी हस्तियों के संपर्क में आया।
• भगोड़ा घोषित: अदालती कार्यवाही के दौरान ही वह अवैध तरीके से अमेरिका भाग गया, जिसके बाद सीबीआई कोर्ट ने उसे 'पीओ' (घोषित अपराधी) करार दे दिया।
सीबीआई ने 127 गवाहों के बयान दर्ज किए थे
फरवरी 2016 में जाट आरक्षण की मांग को लेकर हरियाणा में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। इस दौरान रोहतक में तत्कालीन वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर पर भीड़ ने लाठियों, तलवारों और पेट्रोल बमों से हमला कर दिया था। घर में तोड़फोड़ की गई, गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया और लूटपाट की गई। इस मामले में सीबीआई ने 127 गवाहों के बयान दर्ज किए थे, जिनमें चार जज और जिले के आला अधिकारी भी शामिल थे। लंबी सुनवाई के बाद, सबूतों के अभाव और गवाहों के मुकर जाने के कारण हाल ही में 56 आरोपियों को रिहा कर दिया गया।
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