हरियाणा की राजनीति में खलबली मचनी शुरू हो गई है क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुभाष बत्रा ने 18 एकड़ जमीन की खरीद-फरोख्त में बड़े घोटाले का मुद्दा उठा दिया है।इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI और हाई कोर्ट के सिटिंग जज से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील भी की है।
90 साल के पट्टे पर है जमीन, बेचने पर रोक
सुभाष बत्रा ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि आईएमटी चौक स्थित यह साढ़े 18 एकड़ जमीन 1986 में 'चिनार इंडस्ट्रीयल फाइनेंस कारपोरेशन' को 90 साल के पट्टे (Lease) पर दी गई थी। नियम के अनुसार, जब तक यह पट्टा रद्द नहीं होता, तब तक जमीन को न तो बेचा जा सकता है और न ही उस पर कोई अन्य निर्माण कार्य हो सकता है। बत्रा का आरोप है कि पट्टा अभी भी प्रभावी है, फिर भी अवैध रूप से इसकी बंदरबांट की जा रही है।
मनीष ग्रोवर के बेटे पर गंभीर आरोप
पूर्व मंत्री ने इस घोटाले में भाजपा के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के बेटे हिमांशु ग्रोवर का नाम भी घसीटा है। बत्रा ने आरोप लगाया कि 300 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की इस बेशकीमती जमीन को महज 25 करोड़ रुपये में हथिया लिया गया। इस जमीन पर सरकार को करीब 80 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलना था, जिसे कथित तौर पर अधिकारियों की मिली भगत से माफ कर दिया गया।
540 करोड़ का खेल
अब इसी जमीन को 60 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से प्लाटिंग कर बेचा जा रहा है, जिससे इसकी कुल कीमत 540 करोड़ रुपये बैठती है। बत्रा ने प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जमीन की चारदीवारी के अंदर करीब 500 हरे पेड़ बिना किसी अनुमति के काट दिए गए हैं, जो कि एक गंभीर अपराध है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और वन विभाग मौन साधे हुए है। उन्होंने बताया कि बिना लाइसेंस के ही वहां कॉलोनी काटी जा रही है और 'मंजी' नाम की सोसाइटी के बोर्ड लगा दिए गए हैं।
सुभाष बत्रा ने किया बड़ा खुलासा
सुभाष बत्रा ने खुलासा किया कि इस घोटाले के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं। उन्होंने कहा, "पट्टे के असली हकदार जल्द ही मीडिया के सामने आएंगे। मैं इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहा हूं और जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा।"
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