Iran-US-Israel War: दिल्ली के जोर बाग में अयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर शिया समुदाय ने कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारेबाजी की है।

Iran-US-Israel War: दिल्ली के जोर बाग एरिया में शिया समुदाय ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर कैंडल मार्च निकालकर शोक जताया है। वहीं अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारेबाजी करके डोनाल्ड ट्रंप का पुतला फूंका और गहरा आक्रोश जताया है। बताया जा रहा है कि इस मार्च में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों समेत बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे, और अमेरिका और इजराइल के खिलाफ आक्रोश जताया।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते दिन 1 मार्च को  सैकड़ों शिया समुदाय के लोग कैंडल मार्च में शामिल हुए थे, जिन्होंने अयतुल्लाह अली खामेनेई मौत पर शोक जताया है। यह मार्च दरगाह शाह-ए-मरदान से शुरू होकर करबला, जोर बाग तक पहुंच गया था। मार्च के दौरान  बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों समेत लोगों के आंखों में आंसू थे, चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था।  मार्च में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पुतले जलाए गए, और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।  

मार्च में शामिल लोगों ने क्या कहा ?

मीडिया से बात करते हुए लोगों ने कहा कि,'हमारे घरों में चूल्हा नहीं जल रहा, हम सब शिया यतीम हो चुके हैं।  हमारा हर बच्चा रो रहा है, हमने अपना रहबर खो दिया है। ट्रंप और नेतन्याहू को गोली मारेंगे, हमें उनकी मौत चाहिए। इजराइल और अमेरिका को नेस्तनाबूद कर देंगे, जैसे आज उनके पुतले जलाए हैं, वैसे ही उन्हें भी जला देंगे। आज का दिन हमारे लिए काला दिन है।' जोर बाग अनजुमन-ए-हैदरी द्वारा आयोजित इस मार्च के मुख्य संरक्षक मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी थे।  

खामेनेई ने इज्जत की मौत को कबूला-मोहम्मद हनीफा 

इस कैंडल मार्च में लद्दाख के सांसद हाजी मोहम्मद हनीफा जान भी शामिल हुए थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, 'जिस तरह धोखे से हमला किया गया, उन्होंने (अयतुल्लाह अली खामेनेई) जालिमों के सामने झुकने से बेहतर इज्जत की मौत को कबूल किया। यह जो नुकसान है, आलम-ए-इंसानियत के लिए है। जो गाजा के यतीम हैं, गाजा में जो बेबसी है, जिनको एक वक्त की रोटी मिलने पर भी पाबंदी लगाई जाती है, उन सबके लिए यह बहुत बड़ा नुकसान है। उन्होंने कहा कि खामेनेई आज इस दुनिया से गए हैं, लेकिन जब तक दुनिया रहेगी, तब तक खामेनेई का नाम कायम रहेगा।' 

उन्होंने आगे कहा कि आज से 1400 साल पहले कर्बला में जो हुआ, इमाम-ए-हुसैन ने जो कुर्बानी आलम-ए-इंसानियत के लिए दी, उसके रास्ते पर चलते हुए खामेनेई ने अपनी पूरी जिंदगी इंसानियत के लिए दी। जो गरीब हैं, उनके हक में हमेशा खड़े रहे। आज एक खामेनेई दुनिया से गया है, आने वाले दिनों में हजारों-लाखों, जो कर्बला को मानते हैं, जो कर्बला के रास्ते पर चलते हैं, हजारों खामेनेई पैदा होंगे। दुनिया के सबसे बड़े दहशतगर्द अमेरिका और इजराइल हैं. भारत का ईरान से बहुत ऐतिहासिक रिश्ता रहा है, तो मैं समझता हूं कि आज जो हुआ है, हमारे देश को उस पर बोलना चाहिए।