Praveen Khandelwal: दिल्ली के चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर देश में बढ़ती हुई जनसंख्या पर प्रबंधन नीति बनाने की मांग की है।

Praveen Khandelwal: दिल्ली के चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने देश की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए एक राष्ट्रीय जनसंख्या प्रबंधन नीति बनाने की बड़ी मांग रखी है। सांसद ने कहा कि देश की आबादी 1.4 अरब से ज्यादा हो चुकी है और यह समय देश के लिए जनसांख्यिकीय रूप से बहुत अहम मोड़ है। उन्होंने जोर दिया कि सही प्रबंधन के बिना यह स्थिति विकास की राह में बाधा बन सकती है।

देश की बढ़ती जनसंख्या को लेकर सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री को बताया कि जनसंख्या एक मूल्यवान संपत्ति और मानव पूंजी का बड़ा स्रोत है, लेकिन यह प्राकृतिक संसाधनों, बुनियादी ढांचे, रोजगार के अवसरों और स्वास्थ्य-शिक्षा जैसी सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ता दबाव डाल रही है। तेजी से बढ़ती आबादी से शहरी भीड़भाड़, बेरोजगारी में वृद्धि, पर्यावरण पर तनाव और जरूरी सेवाओं पर बोझ बढ़ रहा है। अगर इसे संरचित नीति के जरिए नहीं संभाला गया तो विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा प्रभावित हो सकती है।

सांसद ने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रस्तावित राष्ट्रीय जनसंख्या प्रबंधन नीति शिक्षा, परिवार नियोजन सेवाओं और क्षेत्र-विशेष रणनीतियों पर आधारित होनी चाहिए। यह नीति जागरूकता, शिक्षा और स्वैच्छिक भागीदारी पर जोर देगी। इसमें महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाएगा और परिवार नियोजन सेवाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों में जनसंख्या वृद्धि के अलग-अलग रुझानों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय रणनीतियां अपनाई जाएंगी।

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि देश फिलहाल जनसांख्यिकीय लाभांश का दौर देख रहा है, जिसमें युवाओं की बड़ी संख्या कार्यबल में आ रही है। लेकिन सही जनसंख्या प्रबंधन और योजना के बिना यह अवसर बोझ में बदल सकता है। राष्ट्रीय नीति से जनसंख्या को आर्थिक क्षमता और संसाधनों के साथ संतुलित किया जा सकेगा। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे की बेहतर योजना बनेगी, सतत शहरीकरण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता सुधरेगी। सांसद ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाए, ताकि टिकाऊ, समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके और जनसांख्यिकीय ताकत आर्थिक-सामाजिक समृद्धि में बदल सके।