आशीष कुमार - बतौली/सरगुजा। छत्तीसगढ़ के ‘शिमला’ कहे जाने वाले मैनपाट से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां अवैध शिकार के लिए बिछाए गए हाई वोल्टेज करंट के जाल ने एक युवक की जान ले ली। घने जंगल में डेढ़ किलोमीटर तक फैले इस ‘मौत के जाल’ में फंसते ही युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ इलाके में सनसनी फैला दी, बल्कि वन विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डेढ़ किलोमीटर लंबा ‘मौत का करंट जाल’
जांच में सामने आया कि शिकारियों ने 300 मीटर नहीं, बल्कि घने जंगल में पूरे डेढ़ किलोमीटर तक जेई नंगे तार का जाल बिछाया था। इस तार को पास के 11 हजार केवी ट्रांसफॉर्मर से अवैध तरीके से जोड़कर उसमें करंट प्रवाहित किया गया था।
इसी जाल में लकड़ी लेने गए 35 वर्षीय मिश्रा यादव की मौके पर ही तड़पकर मौत हो गई। उसके साथ गए रिश्तेदार बाल-बाल बचे। जाल में एक सियार की भी मौत हुई। पूर्व में भी इसी जंगल क्षेत्र में करंट जाल की वजह से भैंस सहित कई जानवरों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं।
ग्रामीणों ने उठाए वन विभाग पर सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर तीखा आक्रोश जताया। उनका आरोप है कि मैनपाट के घने जंगलों में लंबे समय से करंट का जाल बिछाकर अवैध शिकार किया जा रहा है, लेकिन विभाग गंभीर कदम नहीं उठा रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि हर बड़े हादसे के बाद ही विभाग सक्रिय होता है जंगलों में लगातार करंट जाल डाले जा रहे हैं जानवरों के साथ इंसानों की जान पर भी खतरा बना हुआ है इसी इलाके में इससे पहले भी करंट जाल के कारण मानव और पशु मृत्यु के मामले सामने आए हैं।
पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई
घटना के बाद मैनपाट थाना प्रभारी मनोज प्रजापति तथा वन विभाग रेंजर प्रशांत की टीम ने क्षेत्र में जाल बिछाकर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी-
- जहूर पिता मानसाय (70 वर्ष)
- जयलाल पिता रूप साय (45 वर्ष)
- घूरसाय पिता सुंदर मांझी (38 वर्ष)
- विश्वनाथ पिता मंगल मांझी (46 वर्ष)
- निर्मल कुजूर पिता सोन साय (65 वर्ष)
- श्याम सुंदर पिता निर्मल कुजूर (25 वर्ष)
सभी पर भारतीय वन संरक्षण अधिनियम 1972 और वन्य प्राणी संरक्षण संशोधन अधिनियम 2002 के तहत कार्रवाई की गई है।
शिकारियों की निगरानी की चाल- फंसते ही भाग गए थे सभी
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी करंट जाल बिछाकर दूर से निगरानी करते थे। किसी के फंसते ही वे फरार हो जाते। उस दिन भी जब मिश्रा यादव जाल में फंसे, तो सभी आरोपी मौके से भाग निकले थे।