केन्द्र सरकार द्वारा जारी नक्सल प्रभावित जिलों की सूची में छत्तीसगढ़ के छह जिले में सर्वाधिक नक्सल प्रभावित अंतिम जिला बीजापुर भी शामिल है। 

राजेश दास- जगदलपुर। केन्द्र सरकार द्वारा जारी नक्सल प्रभावित जिलों की सूची में छत्तीसगढ़ के छह जिले में सर्वाधिक नक्सल प्रभावित अंतिम जिला बीजापुर भी शामिल है। बीजापुर जिले की भगौलिक परिस्थिति अन्य जिलों से भिन्न है। इस जिले में एसजेडसीएम व पश्चिम बस्तर डिविजन का इंचार्ज पापाराव है, जो दो दिन पूर्व तेलगांना में आत्मसमर्पण करने वाले केंद्रीय समिति सदस्य मुरली उर्फ संग्राम के का बेहद खास सिपहसलार है। पश्चिम बस्तर डिविजन का गंगालूर एरिया के अलावा नेशनल पार्क एरिया व दक्षिण बस्तर डिविजन माओवादियों का मजबूत गढ़ रहा है। पापाराव इसी इलाके में अधिक सक्रिय रहा है, जो मूलतः बीजापुर जिले के किस्टाराम थाना क्षेत्र का रहने वाला है। वर्तमान में भी पश्चिम बस्तर डिविजन का गंगालूर व बासागुड़ा अपनी भागौलिक स्थिति के चलते माओवादियों का गढ़ बना हुआ है। यहां से ही कैडर नक्सलियों की आवाजाही पड़ोसी राज्यों के अलावा उतर बस्तर की ओर अधिक होती है, जो एक तरह से लाइफ लाइन का काम करता रहा है।

माओवादियों का अंतिम गढ़ भी होगा जल्द नक्सलमुक्त 
सुन्दरराज पट्टलिंगम ने बताया कि , पश्चिम बस्तर डिविजन का गंगालूर व बासागुड़ा अपनी भागौलिक स्थिति के चलते माओवादियों का सेफ जोन माना जाता रहा है। अबूझमाड़ भी लगभग क्लियर हो चुका है और अंतिम गढ़ बीजापुर ही  बचा है , जिस पर हमारा पूरा फोकस है। जल्द ही समर्पण नहीं करने पर बचे हुए नक्सलियों को समाप्त कर बीजापुर को नक्सलमुक्त कर लिया जाएगा, जिसके लिए हम प्रयासरत है। 

33 दिन शेष निशाने में होंगे पापाराव, विज्जा हेमला, झितरू केशा, शंकर, प्रकाश व अन्य 77
बीजापुर जिले में बचे हुए शीर्ष नक्सलियों में एसजेडसीएम व पश्चिम बस्तर डिविजन का इंचार्ज पापाराव कुड़म उर्फ सुन्नम चंदैया उर्फ मंगू के अलावा डीवीसीएम व दक्षिण बस्तर डिविजन मिलिट्री कमाण्डर इन चीफ विज्जा हेमला, प्लाटून नम्बर 12 का इंचार्ज व कमाण्डर डीवीसीएम शंकर मुचाकी, प्लाटून 2 का कमाण्डर डीवीसीएम प्रकाश माड़वी, पीएलजीए बटालियन नम्बर 1 व कम्पनी नम्बर 2 का सीवायपीसीएम कमाण्डर केशा सोढ़ी, प्लाटून नम्बर 13 का इंचार्ज डीवीसीएम झितरू ओयाम उर्फ अशोक समेत 83 हथियारबंद नक्सली बीजापुर जिले में सक्रिय हैं। बचे हुए नक्सलियों से लगातार समर्पण कर हथियार डालने की अपील की जा रही है। बचे हुए नक्सलियों की तलाश में सुरक्षाबलों द्वारा जंगलों में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इनके समर्पण करने या मुठभेड़ में मार गिराए जाने के बाद बीजापुर जिला नक्सलमुक्त जिले की श्रेणी में शामिल हो जाएगा। फोर्स लगातार प्रयास कर रही है कि बचे हुए नक्सली समर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो जाए नहीं तो निर्धारित डेड लाइन 31 मार्च 2026 के लिए मात्र 33 दिन शेष है, इन दिनों में समर्पण नहीं करने पर इन इन सभी हार्डकोर नक्सलियों का खात्मा तय माना जा रहा है।

787 दिन में 233 हार्डकोर नक्सली ढेर, 268 हथियार बरामद
केन्द्र सरकार के 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के खात्मे के डेडलाइन को मात्र 33 दिन शेष बचे हैं, इस डेट के ऐलान के बाद से ही सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिला बीजापुर में सुरक्षाबलों द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षाबलों द्वारा वर्ष 2024 व 2025 में सर्वाधिक 221 हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया गया, मारे गए नक्सलियों में केन्द्रीय समिति सदस्य से लेकर नक्सल कमाण्डरों व डीकेएसजेडसीएम को मार गिराया। वहीं इस वर्ष बीते 57 दिन में 12 हार्डकोर नक्सली मुठभेड़ में ढेर हो चुके हैं। बीते 787 दिन में सुरक्षाबलों ने 233 हार्डकोर नक्सली को ढेर कर चुके है। वहीं 268 हथियार भी बरामद किया जा चुका है। वर्ष 2024 में सुरक्षाबलों ने बीजापुर जिले में विशेष अभियान चलाकर अलग अलग मुठभेड़ों में 58 हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया था, वहीं वर्ष 2025 में 163 तथा इस वर्ष 57 दिन में 12 हार्डकोर मुठभेड़ में ढेर किया जा चुका है। बीते 787 दिन में 233 नक्सलियों को ढेर करने के साथ ही 268 हथियार बरामद करते हुए 1174 नक्सलियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। वहीं शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 906 ने आत्म समर्पण किया। वहीं विशेष अभियान चलाकर इन 900 कमाण्ड व प्रेशर आईईडी बरामद किया जा चुका है। इस अवधि में जिले को नक्सलमुक्त करने नक्सलियों से बहादुरी से मुकाबला करते हुए 25 जवान शहीद हो चुके है। नक्सलियों के खात्में में बीजापुर जिले के धूर नक्सल प्रभावित इलाकों में खोले गए सुरक्षा कैम्पों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिले में वर्ष 2024 में 9 जबकि वर्ष 2025 में 21 तथा वर्ष 2026 में 4 नए कैम्प खोले जा चुके है।