धमतरी जिले के सेमरा गांव में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार मुख्य तिथि से एक सप्ताह पहले ही होलिका दहन और रंगोत्सव मनाया गया।

उमेश सिंह बशिस्ट - धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का छोटा सा गांव सेमरा (सी) समय से परे अपनी विशिष्ट संस्कृति को आज भी जीवंत रखे हुए है। यहाँ मंगलवार रात परंपरागत विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया गया, और बुधवार सुबह से पूरा गांव रंग-गुलाल और फाग गीतों में रंगोत्सव मना रहा है।

परंपरा जो समय से भी पुरानी
सेमरा गांव में मुख्य तिथि से ठीक सात दिन पहले होली मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। ग्रामीणों का मानना है कि उनके आराध्य ‘सिरदार देव’ ने पूर्वजों को स्वप्न में आदेश दिया था कि गांव की सुरक्षा और समृद्धि के लिए हर त्यौहार समय से पहले मनाया जाए। आज भी गांव की नई पीढ़ी इस परंपरा को उतनी ही श्रद्धा के साथ निभा रही है जितनी पूर्वजों ने निभाई थी।

मान्यता से जुड़ी आस्था
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि कभी कुछ ग्रामीणों ने मुख्य तिथि पर होली मनाने का प्रयास किया था, जिसके बाद गांव में बीमारियाँ और अकाल जैसे हालात बने। तब से पूरे समुदाय में यह विश्वास गहराता गया कि पारंपरिक तिथि से पहले त्यौहार मनाना ही गांव की रक्षा का मार्ग है।

रंगोत्सव का उल्लास और सामाजिक जुड़ाव
इस विशेष अवसर पर सेमरा गांव की विवाहित बेटियाँ भी मायके आती हैं। गांव और आसपास का क्षेत्र अबीर-गुलाल, ढोल, मंजीरा और फाग गीतों की धुनों से सराबोर रहता है। यह अनोखी रीत न सिर्फ सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण है, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी मजबूत प्रतीक है।