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बलौदाबाजार जिले में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। पहले दिन बीए अंतिम वर्ष के छात्रों ने पर्यावरण का पेपर दिया।

कुश अग्रवाल- बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में शनिवार से पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों की वार्षिक परीक्षाओं की शुरुआत हो गई। परीक्षा के पहले दिन बीए अंतिम वर्ष के छात्रों ने पर्यावरण विषय का पेपर दिया। परीक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

आपको बता दें कि, बड़ी संख्या में परीक्षार्थी समय से पहले ही अपने-अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए थे। जिले के दाऊ कल्याण सिंह महाविद्यालय में भी सुबह करीब 8 बजे से वार्षिक परीक्षा शुरू हुई। परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्र-छात्राएं निर्धारित समय से पहले कॉलेज पहुंच गए थे। महाविद्यालय प्रशासन की ओर से परीक्षा को लेकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। परीक्षा कक्षों में परीक्षार्थियों को निर्धारित समय पर प्रवेश दिया गया और परीक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के सात कैंडिडेट ने UPSC में मारी बाजी
वहीं प्रदेश के 7 कैंडिडेट्स का भी चयन यूपीएससी में हुआ है। अन्य वर्षों की तुलना में इस बार रायपुर का प्रदर्शन अच्छा रहा है। चयनित होने वाले परीक्षार्थियों में से 3 रायपुर जिले के हैं। चयनित परीक्षार्थियों की एक बात कॉमन रही कि उनमें से सभी ने शुरुआत से ही अपना लक्ष्य स्पष्ट रखा। तैयारी भी इसके अनुसार ही की और सफलता हासिल की। हरिभूमि ने चयनित परीक्षार्थियों से विशेष चर्चा की। इनमें उन्होंने अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव के अलावा परीक्षा की अपनी तैयारियों के तरीके भी साझा किए।

इनका हुआ चयन

  • वैभवी अग्रवाल, रायपुर, 35वां रैक
  • अनुभव अग्रवाल दुर्ग, 188वां रैंक
  • दर्शना सिंह, एमसीबी 283वां रैंक
  • डायमंड सिंह ध्रुव, धमतरी, 623वां रैंक
  • रौनक अग्रवाल, रायपुर, 772 वां रैंक
  • अंकित सकनी, बीजापुर, 816वां रैंक
  • संजय डहरिया, महासमुंद, 946 वां रैंक

8 साल कैंसर से लड़ाई, फिर जीती यूपीएससी की जंग
महासमुंद जिले के बेलटुकरी के एक किसान के बेटे संजय डहरिया के यूपीएसी चयन की कहानी बड़ी ही दर्दभरी और चुनौतीपूर्ण है। संजय ने हरिभूमि से खास बातचीत में बताया कि यूपीएसी की तैयारी से पहले वह 8 साल कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। जब वे कैंसर से उबरे, तब 2022 में यूपीएसी की तैयारी शुरू की। इसके लिए वह रायपुर के चौबे कॉलोनी में किराए से मकान लिया। नालंदा परिसर स्थित लाइब्रेरी में रोजाना सुबह 8 से रात 10 बजे तक 4 साल तक यूपीएसी की तैयारी करते रहे। संजय ने बाताया, स्नातक की पढ़ाई के दौरान समय 2012 में उन्हें कान के पास कैंसर डिटेक्ट हुआ, उसके बाद 8 साल तक मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में इलाज चला।

इस बीमारी ने शरीर को असहनीय दर्द से तोड़कर रख दिया। मध्यवर्गीय किसान पिता लखन डहरिया और माता रेशम डहरिया के लिए आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई। बेटे के लिए माता-पिता ने किसी भी तरह इलाज का खर्च उठाया। संजय कैंसर से 2019 में उबर गए। इसके बाद माता-पिता के त्याग और अपने समर्पण से मंजिल फतह कर ली। संजय ने बताया कि उसने 5वीं तक गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाई की है। इसके बाद 6वीं कक्षा से 12वीं तक नवोदय विद्यालय माना से हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई पूरी की और कला संकाय से स्नातक की पढ़ाई की।

इंजीनियरिंग की, लेकिन सेवा के लिए समाजशास्त्र लेकर क्लीयर किया यूपीएससी 
बीजापुर जिले के भैरमगढ़ निवासी साधारण किसान सकनी चंदैया और माता जमुना सकनी के पुत्र अंकित ने यूपीएससी में 816वां स्थान प्राप्त किया। उन्होंने 5वीं तक की प्रारंभिक शिक्षा भैरमगढ़ के सरस्वती शिशु मंदिर में प्राप्त की। उसके बाद जवाहर उत्कर्ष योजना में उत्तीर्ण होकर निजी विद्यालय में शिक्षा हासिल की। भिलाई इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर 2022 में पासआउट होने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की।

उनका कहना है, आईएएस मेरा लक्ष्य था इसलिए पिछले 3 साल से ऑनलाइन गाइडेंस लेकर पढ़ाई करता रहा। इस सफलता का श्रेय माता-पिता के अलावा टीचर्स को जाता है, जिन्होंने मुझे पढ़ाई में मदद के साथ प्रेरित किया। अंकित ने कहा कि उन्हें आईपीएस अलॉट होने की उम्मीद है लेकिन आईएएस बनने के लिए प्रयास लगातार जारी रखेंगे। उन्होंने इस सफलता के लिए 9 से 10 घंटे तक नियमित पढ़ाई करने की बात कही। यूपीएससी के लिए उन्होंने समाजशास्त्र विषय का चयन किया। उनके पिता जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में बीजापुर जैसे पिछड़े और संवेदनशील क्षेत्र में जन सेवा का कार्य कर चुके हैं।

आईआईटी से एमटेक के बाद ठुकराया लाखों का पैकेज
केंद्रीय विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वैभवी ने जेईई मेन्स क्लीयर किया। बांबे आईआईटी से एमटेक करने के बाद वैभवी अग्रवाल ने यूपीएसी में 35वां रैंक हासिल किया है। वैभवी ने बताया, एमटेक के बाद कई मल्टी नेशनल कंपनियों से जॉब ऑफर आए पर नौकरी नहीं की। अपने सपने को पाने के लिए जॉब ऑफर को ठुकरा दिया और 2023 से यूपीएसी की तैयारी में जुट गई। उन्हें यूपीएससी के तीसरे प्रयास में सफलता मिली है। पहले दो प्रयासों में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कमियों को समझा और उन्हें सुधारने पर काम किया।

उन्होंने बताया कि, दिल्ली में हुए साक्षात्कार के दौरान उनसे एक बेहद रोचक सवाल पूछा गया। इंटरव्यू के समय वैभवी ने छत्तीसगढ़ी ट्राइबल आर्ट डिजाइन वाली साड़ी पहन रखी थी। पैनल के एक सदस्य ने उनसे पूछा कि साड़ी पर बना यह आर्ट क्या दर्शाता है? इस सवाल के जवाब में वैभवी ने बताया कि यह छत्तीसगढ़ की मुड़िया जनजाति से जुड़ा पारंपरिक आर्ट है। उनके इस जवाब से इंटरव्यू पैनल काफी प्रभावित हुआ। वैभवी के पिता शीतल अग्रवाल ने बताया कि जब वैभवी व केवल 4 साल की थी, तब उनकी मां प्रतिभा अग्रवाल का निधन हो गया था। वैभवी यूपीएससी में चयन के बाद महिलाओं की बेहतरी के लिए कार्य करना चाहती हैं।

किसान की बेटी, आईआईटी के बाद चुनी सेवा की राह
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनकपुर की रहने वाली दर्शना सिंह ने 383वें रैंक के साथ सूची में अपना स्थान बनाया। दर्शना सिंह की माता सीमा सिंह नगर पंचायत जनकपुर की पार्षद हैं, जबकि उनके पिता अरुण सिंह किसान हैं। दर्शना सिंह ने बारहवीं तक की पढ़ाई अपने गांव के स्कूल से की है। उन्होंने गणित विषय लेकर 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की फिर जेईई के जरिए आईआईटी कानपुर में एडमिशन लिया। दर्शना सिंह जब पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी तभी से अधिकारी बनना चाहतीं थीं।

अपने सपने को पूरा करने के लिए दर्शना सिंह बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चली गई। बकौल दर्शना, मुख्य परीक्षा तक के लिए किताबों का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। साक्षात्कार के लिए उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों से बात की। ज्यादा से ज्यादा अपने गांव, जिले, प्रदेश और प्रदेश के विषय में जानने का प्रयास किया। दर्शना फिलहाल आईपीएस ट्रेनिंग के साथ ही आईएएस बनने के लिए एक और प्रयास करते हुए तीसरा अटेम्प्ट देंगी।

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