कुश अग्रवाल - बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बलौदा बाजार के दौरे पर नक्सलवाद खत्म करने की घोषित डेडलाइन पर सरकार से कड़े सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि शांति स्थापित होना स्वागतयोग्य है, लेकिन इसके बाद बस्तर के लोगों और संसाधनों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
सरकार की डेडलाइन पर बैज ने उठाए सवाल
बलौदा बाजार में कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए दीपक बैज ने 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने की केंद्र और राज्य सरकार की घोषणा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह डेडलाइन सरकार ने संयुक्त रूप से तय की है, लेकिन अब समय सीमा पूरी होने में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में यदि 31 मार्च के बाद भी नक्सली घटनाएं होती हैं तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
आदिवासियों पर फर्जी मामलों का खतरा- बैज
बैज ने चिंता जताई कि नक्सलवाद के नाम पर निर्दोष आदिवासियों को फर्जी मामलों में नक्सली बताकर जेल भेजने की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि जंगलों में रहने वाले आदिवासी स्वतंत्र रूप से वन उपज एकत्र कर सकें, यह सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी स्थिति में ग्रामीणों को उत्पीड़न का सामना नहीं करना चाहिए।
नक्सलवाद खत्म होने के बाद की वास्तविक चुनौती
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होना पूरे प्रदेश के लिए सकारात्मक होगा, लेकिन इसके बाद बस्तर के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरेगी। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार यह भरोसा दिला सकती है कि बस्तर के खनिज संसाधन निजी कंपनियों को नहीं सौंपे जाएंगे और स्थानीय आदिवासियों को प्राथमिकता मिलेगी?
बस्तर की पहचान और अधिकारों की रक्षा अनिवार्य
बैज का कहना है कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद बस्तर के लोगों, उसकी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा चाहती है कि बस्तर में पूरी तरह शांति स्थापित हो और वहां के निवासियों के अधिकार सुरक्षित रहें।