Bihar Rajya Sabha Election 2026: बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की उम्मीदवारी को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि, कुशवाहा ने विश्वास जताया है कि एनडीए सभी पांचों सीटों पर विजय प्राप्त करेगा, लेकिन खुद के नाम पर उन्होंने निर्णय भाजपा और गठबंधन के सहयोगियों पर छोड़ दिया है।
कुशवाहा बोले- सभी मिलकर लेंगे फैसला
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को पटना में मीडिया से मुखातिब होते हुए अपनी राज्यसभा दावेदारी पर सस्पेंस बनाए रखा। उन्होंने कहा कि कौन संसद के ऊपरी सदन में जाएगा और कौन नहीं, इसका अंतिम फैसला एनडीए के सभी घटक दल आपसी सहमति से लेंगे।
पहले चिराग पासवान की मां रीना पासवान के नाम की चर्चा ने कुशवाहा की धड़कनें बढ़ा दी थीं, लेकिन चिराग द्वारा अपनी मां की दावेदारी से इनकार करने के बाद अब सबकी नजरें भाजपा के फैसले पर टिकी हैं।
संख्या बल का गणित
बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, राज्यसभा की 5 में से 4 सीटों पर एनडीए की जीत सुनिश्चित है। इनमें से 2 सीटें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू के खाते में जा सकती हैं। शेष 2 सीटों पर उम्मीदवार तय करने का अधिकार भाजपा के पास है।
चर्चा है कि भाजपा एक सीट पर अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को उतार सकती है, जबकि दूसरी सीट पर उपेंद्र कुशवाहा को दोबारा मौका मिल सकता है। हालांकि, पार्टी के भीतर भोजपुरी स्टार पवन सिंह जैसे अन्य नामों की चर्चा ने संशय को और गहरा कर दिया है।
पांचवीं सीट पर दिलचस्प मुकाबला
राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर बिहार का राजनीतिक माहौल काफी रोमांचक हो गया है। एनडीए को इस सीट पर जीत के लिए 3 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। वहीं, दूसरी तरफ विपक्षी महागठबंधन भी एक सीट पर उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रहा है, जिसके लिए उन्हें 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) ने भी अपना प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है, जिससे आरजेडी के समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
मतदान या निर्विरोध निर्वाचन?
अगर विपक्षी गठबंधन और ओवैसी की पार्टी अपने उम्मीदवार मैदान में डटे रहते हैं, तो 16 मार्च को मतदान होना तय है। यदि विपक्ष पीछे हट जाता है, तो एनडीए के सभी पांच उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे। 5 विधायकों वाली एआईएमआईएम और एक विधायक वाली बसपा की भूमिका इस चुनाव में किंगमेकर की हो सकती है। 5 मार्च को नामांकन की अंतिम तिथि है, जिसके बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी कि उपेंद्र कुशवाहा की संसद में वापसी होगी या नहीं।