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बिहार में नीतीश कुमार के इस्तीफे पर तेजस्वी यादव ने मोर्चा खोल दिया है। तेजस्वी ने इसे 'सुपर सियासी मंडे' बताते हुए बीजेपी पर विश्वासघात का आरोप लगाया।

Tejashwi Yadav on Nitish Kumar Resignation: बिहार के सियासी गलियारों में मचे घमासान के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बीजेपी की रणनीति पर तीखा प्रहार किया है। नीतीश कुमार के विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने पर तेजस्वी ने कहा कि यह कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पहले जनता को छला और अब अपने ही सहयोगी नीतीश कुमार को रास्ते से हटा रही है।

बिहार में महाराष्ट्र वाला खेल?
तेजस्वी ने महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में भी उसी 'पैटर्न' पर काम हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार अपनी मर्जी से राज्यसभा नहीं जा रहे, बल्कि उन्हें मजबूर किया गया है। तेजस्वी के मुताबिक, "हमने तो पहले ही कह दिया था कि बीजेपी धीरे-धीरे उन्हें शक्तिहीन कर देगी। अब वे केवल विधानमंडल से बाहर नहीं हुए हैं, जल्द ही मुख्यमंत्री का पद भी उनके हाथ से निकल जाएगा।"

मनोज झा और पप्पू यादव ने भी उठाए सवाल
आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि नीतीश कुमार को दिल्ली "भेजा" जा रहा है, वे खुद नहीं जा रहे। वहीं, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने चेतावनी दी कि अगर बीजेपी ने बिहार में अपनी पसंद का मुख्यमंत्री बिठाया, तो जेडीयू का वजूद खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने सलाह दी कि नीतीश को बिहार नहीं छोड़ना चाहिए और अगर वे जाते भी हैं, तो अपनी पार्टी के ही किसी नेता को कमान सौंपनी चाहिए।

निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर प्रतिक्रिया
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने की अटकलों पर तेजस्वी यादव ने संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर युवा के आने का स्वागत है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि समय ही यह तय करेगा कि निशांत अपनी विरासत और पार्टी की जिम्मेदारी कितनी कुशलता से संभाल पाते हैं।

30 मार्च: बिहार की राजनीति का निर्णायक मोड़
सोमवार का दिन बिहार के लिए ऐतिहासिक रहा। दो दशकों तक सूबे की सियासत की धुरी रहे नीतीश कुमार ने सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उनका यह कदम राज्य में एक बड़े 'पावर शिफ्ट' की ओर इशारा कर रहा है, जिसे विपक्ष बीजेपी की विस्तारवादी नीति का हिस्सा मान रहा है।

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