बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 में चिराग पासवान ने अपनी मां रीना पासवान की दावेदारी से इनकार कर दिया है। इससे उपेंद्र कुशवाहा के राज्यसभा जाने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। जानें बिहार विधानसभा का पूरा समीकरण।

Bihar Rajya Sabha Election 2026: बिहार में राज्यसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान के एक हालिया बयान ने एनडीए के भीतर चल रही खींचतान को काफी हद तक शांत कर दिया है। चिराग ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी मां रीना पासवान राज्यसभा की रेस में नहीं हैं, जिससे अब उपेंद्र कुशवाहा की राह आसान होती दिख रही है।

चिराग पासवान ने अटकलों को किया खारिज
पिछले कुछ दिनों से सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजने के लिए भाजपा पर दबाव बना रहे हैं। इससे एनडीए के दूसरे साथी उपेंद्र कुशवाहा की सीट पर खतरा मंडराने लगा था। हालांकि, शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इन सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया।

उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि उनकी मां सक्रिय राजनीति में नहीं आ रही हैं और न ही वह राज्यसभा की दावेदार हैं। चिराग के इस रुख से उपेंद्र कुशवाहा ने बड़ी राहत की सांस ली है।

उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा का पुराना वादा
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल इस साल खत्म हो रहा है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजकर राजनीतिक संजीवनी दी थी।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जब कुशवाहा नाराज थे, तब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें दिल्ली बुलाकर यह भरोसा दिलाया था कि उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा और पार्टी में एक एमएलसी सीट भी दी जाएगी।

अब चिराग के रेस से बाहर होने के बाद गेंद पूरी तरह भाजपा के पाले में है कि वह अपने वादे को कैसे निभाती है।

एनडीए और महागठबंधन का संख्या बल
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में अंक गणित काफी दिलचस्प है। एनडीए के पास वर्तमान में 202 विधायकों का समर्थन है, जो 5 में से 4 सीटों पर जीत पक्की करने के लिए काफी है। एक सीट के लिए 41 विधायकों के वोट की जरूरत होती है।

भाजपा अपने कोटे से नितिन नवीन को राज्यसभा भेज सकती है, जबकि दूसरी सीट सहयोगियों के लिए छोड़ी जा सकती है। वहीं, विपक्ष यानी महागठबंधन के पास केवल 35 विधायक हैं। तेजस्वी यादव को अपनी एक सीट बचाने के लिए ओवैसी की पार्टी (AIMIM) और बसपा के समर्थन की जरूरत होगी।

5वीं सीट के लिए रोचक हो सकता है मुकाबला
अगर एनडीए पांचवीं सीट पर भी अपना प्रत्याशी उतारता है या ओवैसी की पार्टी मैदान में डटी रहती है, तो 16 मार्च को मतदान की स्थिति बनेगी। एनडीए को पांचवीं सीट जीतने के लिए केवल 3 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है, जबकि विपक्ष को 6 वोटों की दरकार है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

5 मार्च को नामांकन की आखिरी तारीख है, जिससे पहले एनडीए और महागठबंधन को अपने उम्मीदवारों के नाम फाइनल करने होंगे।