(रुचि राजपूत )
पौराणिक कथा के अनुसार
पौराणिक हिन्दू कथाओं में एक वर्णन मिलता है। जब भगवान विष्णु धरती पर आए थे तब वे मानव जाती के उत्थान के लिए अपने साथ माता लक्ष्मी, नारियल का पेड़ और कामधेनु गाय लाए थे। ऐसा भी माना जाता है कि नारियल के पेड़ में तीनों देवों ब्रम्हा, विष्णु, महेश का वास होता है। इसीलिए पूजा-पाठ में नारियल फोड़ना और चढ़ाना शुभ माना जाता है। मान्यता यह भी है कि एक समय हिन्दू धर्म में मानव और जानवरों की बलि एक समान मानी जाती थी। इसी परंपरा को तोड़ने के लिए नारियल चढ़ाने की प्रथा की शुरुआत हुई।
नारियल को हिन्दू धर्म में शुभ और मंगलकारी माना जाता है। नारियल के बाहरी खोल की तुलना इंसान के अहंकार से की जाती है और अंदर की सफेद, नर्म सतह को शांति का प्रतीक माना जाता है, और पूजा-पाठ में नारियल चढ़ाने का एक भाव यह होता है कि हमने अपने आप को भगवान के श्री चरणों में समर्पित कर दिया है। ऐसी मान्यता है कि पूजा-पाठ में नारियल चढ़ाने से धन संबंधी सभी परेशानियां दूर होती हैं।
श्रीफल या नारियल को बीज रूप माना जाता है। इसलिए नारियल को प्रजनन या उत्पादन का कारक माना गया है। महिलाएं भी बीज रूप में ही बच्चों को जन्म देती हैं। इसी कारण से हिन्दू धर्म में महिलाओं का नारियल फोड़ना निषेध माना गया है। पूजा पाठ में अक्सर हमने देखा होगा नारियल पुरुष ही फोड़ते है क्योंकि नारियल फोड़ना महिलाओं के लिए अशुभ माना जाता है।








