23 Jan 2024
फोटो क्रेडिट: Google
अयोध्या के राम मंदिर में भगवान श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है।
22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में वैदिक प्रक्रिया के साथ रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई।
राम मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम के बाल स्वरूप की मूर्ति स्थापित की गई है। ये मूर्ति श्यामल रंग या काले रंग की है।
इस मूर्ति के रंग को लेकर जिज्ञासा बनी हुई है। लोगों के मन में सवाल है कि ये मूर्ति काले रंग की क्यों है।
आखिर मूर्ती का रंग काला क्यों है? इसके पीछे क्या रहस्य है, आइए जानते हैं...
महर्षि वाल्मीकि की रामायण में भगवान राम का श्यामल रूप का वर्णन किया गया है। इसलिए भगवान राम को श्याम रंग में ही पूजा जाता है।
रामलला की ये मूर्ति कृष्ण शिला या श्याम शिला के पत्थर से बनाई गई है। मूर्ति का निर्माण ब्लैक ग्रेनाइट से हुआ है।
इस पत्थर की कई खूबियां हैं। इसमें किसी भी प्रकार की दरार नहीं आती है। ये पानी को अवशोषित नहीं करता और ना ही इसमें किसी भी तरह के रसानियक पदार्थों के मिलने से नुकसान पहुंचता है।
मूर्ति का अभिषेक करने के लिए हल्दी, चंदन, दूध, घी, शहद, दही जैसी चीजों के इस्तेमाल करने से भी कोई नुकसान नहीं होगा।
ये पत्थर कई सालों तक अच्छी अवस्था में रहता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, रामलला की मूर्ति के लिए उपयोग किया गया पत्थर 2.5 अरब साल पुराना है।