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रक्षा मंत्रालय की DAC बैठक में आज S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की 5 नई यूनिट्स और 800 किमी रेंज वाली ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद को मंजूरी मिल सकती है। जानिए भारतीय सेना की ताकत कैसे बढ़ेगी।

S-400 deal: भारतीय सेना की मारक क्षमता को और घातक बनाने के लिए आज एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 'डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल' (DAC) कई अहम रक्षा सौदों पर मुहर लगा सकती है। इस बैठक में तीनों सेनाओं के प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) भी शामिल होंगे।

S-400 के 5 नए स्क्वाड्रन की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना के लिए रूस से 5 अतिरिक्त S-400 सुदर्शन एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान इस सिस्टम ने 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर दुश्मन के विमानों को मार गिराकर अपनी ताकत साबित की थी। भारत पहले से ही 5 स्क्वाड्रन का ऑर्डर दे चुका है, जिसकी चौथी यूनिट जल्द भारत पहुँचने वाली है।

ब्रह्मोस और धनुष से बढ़ेगी सेना की मारक क्षमता
भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता को 800 किलोमीटर तक ले जाने की तैयारी में है। इसके लिए बड़ी संख्या में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की खरीद को मंजूरी मिल सकती है। इसके अलावा, 300 स्वदेशी धनुष होवित्जर तोपों का प्रस्ताव भी टेबल पर है, जो सीमा पर आर्टिलरी पावर को नई ऊंचाई देगा।

आसमान में स्वदेशी ड्रोन का पहरा
निगरानी और सटीक हमले के लिए भारतीय वायुसेना Remotely Piloted Strike Aircraft (मानवरहित लड़ाकू जेट) के 4 स्क्वाड्रन शामिल करना चाहती है। ये स्वदेशी लड़ाकू ड्रोन न केवल लंबी दूरी तक दुश्मन पर नजर रखेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर सटीक बमबारी करने में भी सक्षम होंगे।

60 ट्रांसपोर्ट विमानों की रेस
वायुसेना अपनी परिवहन क्षमता को मजबूत करने के लिए 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने की योजना पर काम कर रही है। इस रेस में अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन, ब्राजील की एम्ब्रेयर और रूस की इल्युशिन जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। यह डील भारतीय सामरिक रसद क्षमता (Strategic Lift) को बदल देगी।

आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
रक्षा मंत्रालय न केवल विदेशी हथियार खरीद रहा है, बल्कि स्वदेशी तकनीक पर भी जोर दे रहा है। 'प्रोजेक्ट कुशा' के तहत DRDO लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां विकसित कर रहा है। आज की बैठक में इन स्वदेशी प्रोजेक्ट्स को भी गति मिल सकती है, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी।

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