Success story of Avnish Indore: इंदौर के अवनीश डाउन सिंड्रोम, दिल में छेद और घुटनों की बीमारी से ग्रसित थे, लेकिन ने प्रेरणा मिली तो कई रिकॉर्ड बना लिए।
Success story of Avnish Indore : जन्म के बाद गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जिस बालक को माता-पिता ने बेसहारा छोड़ दिया था। आज वह अपनी प्रतिभा के दम पर देश-दुनिया में नाम रोशन कर रहा है। जी हां बात इंदौर के इंदौर के 9 वर्षीय अवनीश तिवारी की। जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 जनवरी को बाल पुरस्कार से सम्मानित किया है।
अवनीश डाउन सिंड्रोम जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। दिल में छेद है और घुटने भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे। इन बीमारियों से परेशान होकर अवनीश को उनके माता-पिता एक साल की उम्र अनाथाश्रम में छोड़ दिया था। कुछ दिन तक वह वहीं पले-बढ़े फिर आदित्य तिवारी का सहारा मिला।
Avnish Indore
आदित्य तिवारी ने अवनीश को गोद देकर न सिर्फ उपचार कराया, बल्कि समुचित देखभाल करते हुए उन्हें हर समय बेहतर काम के लिए प्रोत्सहित करने लगे। आदित्य की प्रेराणा और सकारात्मक प्रयास की बदौलत अवनीश ने कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। सरकार ने उनकी प्रतिभा और चुनौतियों से लड़ने की क्षमता को देखते हुए राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया है।
राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले अवनीश मप्र के अकेले राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से देशभर में जिन 19 प्रतिभावन बच्चों को सम्मानित किया गया है, उनमें मप्र से अकेले इंदौर के अवनीश शामिल हैं। 7 साल की उम्र में गंभीर बीमारियों को मात देकर अवनीश ने एवरेस्ट फतह किया था। अब वह अपने जैसे अन्य बच्चों के अधिकार सुरक्षित कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं। मंगलवार को PM मोदी ने संवाद कर अवनीश सहित पुरस्कार पाने वाले सभी बच्चों का मनोबल बढ़ाया।